Imam Ibnu Majah : 3354
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي عَرُوبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ سَالِمِ بْنِ أَبِي الْجَعْدِ الْغَطَفَانِيِّ عَنْ مَعْدَانَ بْنِ أَبِي طَلْحَةَ الْيَعْمَرِيِّأَنَّ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ قَامَ يَوْمَ الْجُمُعَةِ خَطِيبًا فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّكُمْ تَأْكُلُونَ شَجَرَتَيْنِ لَا أُرَاهُمَا إِلَّا خَبِيثَتَيْنِ هَذَا الثُّومُ وَهَذَا الْبَصَلُ وَلَقَدْ كُنْتُ أَرَى الرَّجُلَ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُوجَدُ رِيحُهُ مِنْهُ فَيُؤْخَذُ بِيَدِهِ حَتَّى يُخْرَجَ بِهِ إِلَى الْبَقِيعِ فَمَنْ كَانَ آكِلَهُمَا لَا بُدَّ فَلْيُمِتْهُمَا طَبْخًا
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [इस्माइल बिन उलय्याह] से [सैद बिन अबू अरूबा] से [कतादाह] से [सलीम बिन अबू अल जा'द अल गठाफानी] से [मदन बिन अबू थल्हाह अल यमरी] से कहिन है, कि [उमर बिन अलघाथ] अल्लाह के बाद जुमरा पर प्रचार किहिन अऊर महिमा किहिन ओनसे उ कहिन, 'ओ सब मनुष्य, वास्तव मा तुम अक्सर दुई पेड़ खात हौ जवन कि हमका लागत है कि दुनौ खराब पेड़ हैं। ई पेड़ लहसुन अऊर शालट हैं। अऊर हम एक बार रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय एक मनई का देखेन जे पेड़ के सुगंध सेघत रहा, यहिसे ओका खींच के बकी से हटावा गा रहा। इसलिये जिसको इन दोनों को खाना चाहे तब तक पहले इनको तब तक पकाये जब तक कि दोनों पूरी तरह से पक न जाएं,"