Imam Ibnu Majah : 3171
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا خَلَفُ بْنُ خَلِيفَةَ ح و حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَنْبَأَنَا مَرْوَانُ بْنُ مُعَاوِيَةَ جَمِيعًا عَنْ يَزِيدَ بْنِ كَيْسَانَ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَتَى رَجُلًا مِنْ الْأَنْصَارِ فَأَخَذَ الشَّفْرَةَ لِيَذْبَحَ لِرَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِيَّاكَ وَالْحَلُوبَ
हमसे कहिन [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [खलफ बिन खलीफा] कहिन हैं। -एक अउर तरीका से ई कहा गा है- हमका बतावा गा है कि [अब्दुर्रहमान बिन इब्राहिम] हमका [मरवान बिन मुआविया] [यजीद बिन कैसान] से [अबू हाजिम] से [अबू हुरैरा] तक सब कुछ बताइस है, कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम अनसार के दोस्तन में से एक के पास आए रहे, एहसे जानवर का वध करै के लिए तैयार कीन गा रहा। रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम के लिए। तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा: 'एक बकरी का वध न करौ जेकरे पास -दूध- पिलावा होय'।