Imam Ibnu Majah : 3133
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ شُرَيْحِ بْنِ النُّعْمَانِ عَنْ عَلِيٍّ قَالَنَهَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يُضَحَّى بِمُقَابَلَةٍ أَوْ مُدَابَرَةٍ أَوْ شَرْقَاءَ أَوْ خَرْقَاءَ أَوْ جَدْعَاءَ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अस शबाह] हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अय्यासी] से [अबू इशाक] से [स्युरैह बिन अन नूमान] से [अली] उ कहिन, 'रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बलि के जानवरन का उनके कान के नोक से वध करै से मना किहिन, उनके कान के आधार का काट के काट दिहिन खुला, खरका` -जिनके कान संकेत के रूप मा जलावा जात है- या जद' -कान जानवरन या ओकर नाक काट दीन गा रहा-'।