Imam Ibnu Majah : 3127
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَعْمَرٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكْرٍ الْبُرْسَانِيُّ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ قَالَ قَالَ عَطَاءٌ الْخُرَاسَانِيُّ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَتَاهُ رَجُلٌ فَقَالَ إِنَّ عَلَيَّ بَدَنَةً وَأَنَا مُوسِرٌ بِهَا وَلَا أَجِدُهَا فَأَشْتَرِيَهَا فَأَمَرَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يَبْتَاعَ سَبْعَ شِيَاهٍ فَيَذْبَحَهُنَّ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन मामर] हमसे कहिन हैं [मुहम्मद बिन बकर अल बुरसानी] हमसे कहिन हैं [इब्नू जुरैज] उ कहिन; ['अथा अल खुरासानी] ने [इब्न अब्बास] से कहा, कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से एक आदमी ने संपर्क किया अऊर कहा, 'मैं एक ऊँट का वध करै का बाध्य हौं अऊर मैं ओका खरीद सकत हौं, लेकिन मैं ओका नाहीं पा सकत हउँ?' तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ओनका सात बकरी खरीदै अऊर ओनका बध करै का आदेश दिहिन।'