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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Ibnu Majah : 1902

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ السَّاعِدِيِّ قَالَدَعَا أَبُو أُسَيْدٍ السَّاعِدِيُّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى عُرْسِهِ فَكَانَتْ خَادِمَهُمْ الْعَرُوسُ قَالَتْ تَدْرِي مَا سَقَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ أَنْقَعْتُ تَمَرَاتٍ مِنْ اللَّيْلِ فَلَمَّا أَصْبَحْتُ صَفَّيْتُهُنَّ فَأَسْقَيْتُهُنَّ إِيَّاهُ

हमसे कहिन [मुहम्मद बिन अश शब्बाह] कहिन, हमसे कहिन [अब्दुल अजीज बिन अबू हाजिम] कहिन, हमसे [मेरे पिता] [सहल बिन सअद अस सैदी] से कहिन, उ कहिन, 'अबू उसैद जैसा कि सैदी ने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम का अपने विलिमा कार्यक्रम मा आमंत्रित किहिन, जबकि अल्लाह-मदर ने ओनके लिए मदद की, 'का तुम जानत हौ कि हम रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का का पेय दिहे रहेन? ऊ आगे कहिस, 'मैं कल रात से खजूर बचावत हौं, सुबह उडारि के ओका दइ दिहेंव'।