Imam Ibnu Majah : 1446
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَا حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَبَّلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عُثْمَانَ بْنَ مَظْعُونٍ وَهُوَ مَيِّتٌ فَكَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَى دُمُوعِهِ تَسِيلُ عَلَى خَدَّيْهِ
हमका बतावा गा है कि [अबू बकर बिन अबू स्याबा] अऊर [अली बिन मुहम्मद] दुइनौ कहिन; हमका [वाकी'] से [सुफयान] से [अशिम बिन उबैदुल्लाह] से [अल कासिम बिन मुहम्मद] से ['ऐस्याह] से कहिन है, उ कहिन, 'रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उथमान बिन मझौन का चूम लिहिन, भले ही उ एक लाश बन गए रहे। मानो हम उनके आँसू उनके गाल पर बहत देखित है। '