Imam Ibnu Majah : 1361
حَدَّثَنَا عِمْرَانُ بْنُ مُوسَى اللَّيْثِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ بْنُ سَعِيدٍ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَخَلَ الْمَسْجِدَ فَرَأَى حَبْلًا مَمْدُودًا بَيْنَ سَارِيَتَيْنِ فَقَالَ مَا هَذَا الْحَبْلُ قَالُوا لِزَيْنَبَ تُصَلِّي فِيهِ فَإِذَا فَتَرَتْ تَعَلَّقَتْ بِهِ فَقَالَ حُلُّوهُ حُلُّوهُ لِيُصَلِّ أَحَدُكُمْ نَشَاطَهُ فَإِذَا فَتَرَ فَلْيَقْعُدْ
हमसे बतावा गा है [इमरान बिन मूसा अल लैट्स] कहिन, हमसे [अब्दुल वारिस बिन सईद] से [अब्दुल अजीज बिन शुहैब] से [अनस बिन मलिक] बतावा गा है, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मस्जिद मा घुसे अऊर दुइ खम्भा के बीच एक रस्सी फैली देखिन, उ कहिन:' ई का है?' दोस्तों, 'यह जैनब का रस्सी है जो नमाज के लिए उपयोग करती है, जब थक जाती है तो रस्सी को खम्भा से बाँध देती है। ' त उ कहिन: 'जाओ, जाओ, जब बलवान हो तब प्रार्थना करो, थक जाओ तो बैठो। '