Imam Ibnu Majah : 699
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ خَالِدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْوَاسِطِيُّ حَدَّثَنَا أَبِي عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ إِسْحَقَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْتَشَارَ النَّاسَ لِمَا يُهِمُّهُمْ إِلَى الصَّلَاةِ فَذَكَرُوا الْبُوقَ فَكَرِهَهُ مِنْ أَجْلِ الْيَهُودِ ثُمَّ ذَكَرُوا النَّاقُوسَ فَكَرِهَهُ مِنْ أَجْلِ النَّصَارَى فَأُرِيَ النِّدَاءَ تِلْكَ اللَّيْلَةَ رَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارِ يُقَالُ لَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدٍ وَعُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ فَطَرَقَ الْأَنْصَارِيُّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْلًا فَأَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِلَالًا بِهِ فَأَذَّنَ قَالَ الزُّهْرِيُّ وَزَادَ بِلَالٌ فِي نِدَاءِ صَلَاةِ الْغَدَاةِ الصَّلَاةُ خَيْرٌ مِنْ النَّوْمِ فَأَقَرَّهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ عُمَرُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَدْ رَأَيْتُ مِثْلَ الَّذِي رَأَى وَلَكِنَّهُ سَبَقَنِي
हमसे कहिन [मुहम्मद बिन खालिद बिन अब्दुल्लाह अल वसीथी] कहिन, हमका [मेरे पिता] से [अब्दुर्रहमान बिन इशाक] से [अज जुहरी] से [सलीम] से [उनके पिता] कहिन; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने दोस्तन से कुछ अइसन बात पर उनकर राय पूछिन जेसे उ नमाज मा जात रहें। तौ उइ तुरहीन का जिक्र किहिन, लेकिन उइका उइ पसंद नाहीं रहे काहे से कि उइ यहूदीयन से मिलत जुलत रहे, फिर उइ घंटियन का जिक्र किहिन, लेकिन उइका उइ पसंद नाहीं रहे काहे से कि उइ ईसाइयन से मिलत जुलत रहे। तौ उ रात अंसार के एक दोस्त का सपना देखा -लफादज़- अज़ान के बारे मा, उ दोस्त अब्दुल्ला बिन जैद के नाम से जाना जात रहा, अऊर उमर बिन अल खत्थब भी। तौ रात मा अंसार के एक दोस्त रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आए, तब रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बिलाल का अज़ान करै का हुकुम दिहिन। अज जुहरी कहिन; 'बिलाल प्रातः अज़ान मा जोड़त है; ASH SHALATU KHAIRUM मिनन्नौम -दमाज नींद से अच्छी है-। तौ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ई फैसला किहिन। तब उमर कहिन; 'हे अल्लाह के रसूल, हमहूँ एक सपना देखेन जइसे उ सपना देखिन, लेकिन उ हमसे आगे रहे'।