Waktu yang dilarang untuk menguburkan jenazah
Imam Nasa'i : 562
أَخْبَرَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ وَهُوَ ابْنُ حَبِيبٍ عَنْ مُوسَى بْنِ عَلِيٍّ عَنْ أَبِيهِ قَالَ سَمِعْتُ عُقْبَةَ بْنَ عَامِرٍ يَقُولُثَلَاثُ سَاعَاتٍ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَنْهَانَا أَنْ نُصَلِّيَ فِيهِنَّ أَوْ نَقْبُرَ فِيهِنَّ مَوْتَانَا حِينَ تَطْلُعُ الشَّمْسُ بَازِغَةً حَتَّى تَرْتَفِعَ وَحِينَ يَقُومُ قَائِمُ الظَّهِيرَةِ حَتَّى تَمِيلَ وَحِينَ تَضَيَّفُ لِلْغُرُوبِ حَتَّى تَغْرُبَ
हमका [हुमैद बिन मसदह] सूचित कइके उ कहिन; हमसे [सुफयान यानी इब्न हबीब] [मूसा बिन अली] से [अपने पिता] से कहिन है उ कहिन; हम [उकबाह बिन अमीर] का कहत सुने रहेन; 'तीन बार अइसन अहै कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम हमका उ समय नमाज पढ़ै या लाश दफनावै से मना किहिन, यानी जब सूरज उगै तक बस उग रहा है, जब सूरज के छाया ओकरे शरीर के समान है - सूरज का एक टुकड़ा - जब तक सूरज ढल न जाय, अऊर जब सूरज डूबै वाला है तब तक जब तक सूरज डूबै वाला है'।