Imam Tirmidzi : 2870
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ بْنُ أَسْبَاطِ بْنِ مُحَمَّدٍ الْقُرَشِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ مُطَرِّفٍ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو قَالَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ فِي كَمْ أَقْرَأُ الْقُرْآنَ قَالَ اخْتِمْهُ فِي شَهْرٍ قُلْتُ إِنِّي أُطِيقُ أَفْضَلَ مِنْ ذَلِكَ قَالَ اخْتِمْهُ فِي عِشْرِينَ قُلْتُ إِنِّي أُطِيقُ أَفْضَلَ مِنْ ذَلِكَ قَالَ اخْتِمْهُ فِي خَمْسَةَ عَشَرَ قُلْتُ إِنِّي أُطِيقُ أَفْضَلَ مِنْ ذَلِكَ قَالَ اخْتِمْهُ فِي عَشْرٍ قُلْتُ إِنِّي أُطِيقُ أَفْضَلَ مِنْ ذَلِكَ قَالَ اخْتِمْهُ فِي خَمْسٍ قُلْتُ إِنِّي أُطِيقُ أَفْضَلَ مِنْ ذَلِكَ قَالَ فَمَا رَخَّصَ لِيقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ يُسْتَغْرَبُ مِنْ حَدِيثِ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو وَرُوِي عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَمْ يَفْقَهْ مَنْ قَرَأَ الْقُرْآنَ فِي أَقَلَّ مِنْ ثَلَاثٍ وَرُوِي عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَهُ اقْرَأْ الْقُرْآنَ فِي أَرْبَعِينَ و قَالَ إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَلَا نُحِبُّ لِلرَّجُلِ أَنْ يَأْتِيَ عَلَيْهِ أَكْثَرُ مِنْ أَرْبَعِينَ يَوْمًا وَلَمْ يَقْرَأْ الْقُرْآنَ لِهَذَا الْحَدِيثِ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ لَا يُقْرَأُ الْقُرْآنُ فِي أَقَلَّ مِنْ ثَلَاثٍ لِلْحَدِيثِ الَّذِي رُوِيَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَخَّصَ فِيهِ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ وَرُوِي عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ أَنَّهُ كَانَ يَقْرَأُ الْقُرْآنَ فِي رَكْعَةٍ يُوتِرُ بِهَا وَرُوِي عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ أَنَّهُ قَرَأَ الْقُرْآنَ فِي رَكْعَةٍ فِي الْكَعْبَةِ وَالتَّرْتِيلُ فِي الْقِرَاءَةِ أَحَبُّ إِلَى أَهْلِ الْعِلْمِ
हमसे ['उबैद बिन असबात बिन मुहम्मद अल कुरासी] बताय के बाद उ कहिन; मोका [मेरे पिता] से [मुथरीफ] से [अबू इशाक] से [अबू बुरदह] से [अब्दुल्लाह बिन अमरू] से कहिन है; हम कहेन; 'हे अल्लाह के रसूल, कब तक कुरान पीसना है?' उ जवाब दिहिन: 'हर महीना एकर प्रचार करा'। हम कहेन; 'मैं वहिसे ज्यादा सक्षम अऊर बेहतर होइ सकत हौं'। उ कहिन: 'बीस दिन के भीतर एकर प्रचार करा'। हम कहेन; 'मैं वहिसे अच्छा कर सकत हौं'। उ कहिन: 'पन्द्रह दिन के भीतर एकर प्रचार करा'। हम कहेन; 'मैं वहिसे अच्छा कर सकत हौं'। उ कहिन: 'दस दिन के भीतर एकर प्रचार करा'। हम कहेन; 'मैं वहिसे अच्छा कर सकत हौं'। उ कहिन: 'पांच दिन के भीतर एकर प्रचार करा'। अब्दुल्ला कहिन; 'वहिके बाद ऊ मोका राहत नाहीं दिहिस'। अबू ईसा कहिन; ई हदीस हसन शाहीह है, अब्दुल्ला बिन अमरू से अबू बुरदह के हदीस से गरीब का फैसला कीन गा है। ई हदीस अब्दुल्ला बिन अमरू से एक अउर सनाद के माध्यम से भी सुनाई गै रही। अऊर ई अब्दुल्ला बिन अमरू से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से रिवायित कीन गा रहा, उ कहिन: 'कोऊ भी ईका समझ नाहीं सकत है जे तीन दिन से कम समय तक कुरान पढ़त है'। अब्दुल्लाह बिन अमरू से रिवायत है कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा: 'चालीस दिन में -खतमकन- कुरान पढ़ो'। इशाक बिन इब्राहिम कहिन; 'यह हदीस के आधार पर, हमका ई पसंद नाहीं है कि अगर केहू के पास से चालीस दिन बीत जाय जब उ कबो कुरान नाहीं पढ़े होय। कुछ विद्वानन का कहब है कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से रिवायत हदीस के आधार पर कुरान का तीन दिन से कम समय तक कुचल नाहीं गा रहा। यहि बीच, कुछ अउर विद्वान यहि मामला मा राहत प्रदान करत हैं। उथमान बिन अफ्फान से रिवायत कीन गा है कि उ एक वितर रकात मा कुरान पढ़िन। साई बिन जुबैर से रिवायत है कि उ काबा के बगल मा एक रकात मा कुरान पढ़िन। अऊर विद्वान टार्टिल पढ़ै का पसंद करत हैं।