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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Tirmidzi : 1872

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا رِشْدِينُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ أَبِي هَانِئٍ الْخَوْلَانِيِّ عَنْ عَبَّاسٍ الْحَجْرِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ قَالَجَاءَ رَجُلٌ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَمْ أَعْفُو عَنْ الْخَادِمِ فَصَمَتَ عَنْهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَمْ أَعْفُو عَنْ الْخَادِمِ فَقَالَ كُلَّ يَوْمٍ سَبْعِينَ مَرَّةًقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ وَرَوَاهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ عَنْ أَبِي هَانِئٍ الْخَوْلَانِيِّ نَحْوًا مِنْ هَذَا وَالْعَبَّاسُ هُوَ ابْنُ جُلَيْدٍ الْحَجْرِيُّ الْمِصْرِيُّ حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ عَنْ أَبِي هَانِئٍ الْخَوْلَانِيِّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ نَحْوَهُ وَرَوَى بَعْضُهُمْ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ وَهْبٍ بِهَذَا الْإِسْنَادِ وَقَالَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو

हमसे [कुतैबा] बताइस है, हमसे [रिसिदीन बिन सद] से [अबू हानी` अल खौलानी] से [अब्बास अल हजरी] से [अब्दुल्ला बिन उमर] कहिस है; एक आदमी पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आया और बोला कि हे रसूल अल्लाह कितनी बार दासी को माफ करूँ? तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम चुप हो गए, फिर पूछा कि हे अल्लाह के रसूल सेवक को कितनी बार माफ करना पड़ता है? पैगम्बर जवाब दिहिन: 'तुम दिन मा सत्तर बार माफ करत हौ'। अबू ईसा ने कहा: यह एक हसन गरीब हदीस है। अऊर [अब्दुल्लाह बिन वहब] द्वारा [अबी हानी अल खौलानी] से ई हदीस के लफाज़ के तरह रिवायित कीन गा है। अल अब्बास इब्न जुलैद अल हाजरी अल मिश्री हैं। हमका [कुतैबा] बताइस है, हमका [अब्दुल्लाह बिन वहब] [अबू हानी` अल खौलानी] से बताइस है उदाहरण के लिए ई सनाद के साथ। अऊर ओनमा से कुछ लोग [अब्दुल्लाह बिन वहब] से ई सनाद के साथे ई हदीस सुनाइन, अऊर उ कहिन; [अब्दुल्लाह बिन अमर] से।