Imam Tirmidzi : 1602
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُمَرَ بْنِ الْوَلِيدِ الْكِنْدِيُّ الْكُوفِيُّ وَأَبُو كُرَيْبٍ وَمُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ قَالُوا حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ عَنْ شَرِيكٍ عَنْ عَمَّارٍ يَعْنِي الدُّهْنِيَّ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَخَلَ مَكَّةَ وَلِوَاؤُهُ أَبْيَضُقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لَا نَعْرِفُهُ إِلَّا مِنْ حَدِيثِ يَحْيَى بْنِ آدَمَ عَنْ شَرِيكٍ قَالَ وَسَأَلْتُ مُحَمَّدًا عَنْ هَذَا الْحَدِيثِ فَلَمْ يَعْرِفْهُ إِلَّا مِنْ حَدِيثِ يَحْيَى بْنِ آدَمَ عَنْ شَرِيكٍ و قَالَ حَدَّثَنَا غَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ شَرِيكٍ عَنْ عَمَّارٍ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَخَلَ مَكَّةَ وَعَلَيْهِ عِمَامَةٌ سَوْدَاءُ قَالَ مُحَمَّدٌ وَالْحَدِيثُ هُوَ هَذَا قَالَ أَبُو عِيسَى وَالدُّهْنُ بَطْنٌ مِنْ بَجِيلَةَ وَعَمَّارٌ الدُّهْنِيُّ هُوَ عَمَّارُ بْنُ مُعَاوِيَةَ الدُّهْنِيُّ وَيُكْنَى أَبَا مُعَاوِيَةَ وَهُوَ كُوفِيٌّ وَهُوَ ثِقَةٌ عِنْدَ أَهْلِ الْحَدِيثِ
हमसे [मुहम्मद बिन उमर बिन अल वलिद अल किंदी अल कुफी] अऊर [अबू कुरैब] अऊर [मुहम्मद बिन रफी] से कहा गा है; हमसे [याह्या बिन आदम] से [स्यारिक] से [अम्मर] - अर्थात् अद दुहनी - [अबू अज़ जुबैर] से [जाबिर] से कहिन है, 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक सफेद झंडा लइके मक्का शहर मा घुसे'। अबू ईसा ने कहा कि ये हदीस हसन गरीब के डिग्री में है, हम यहाया बिन आदम के हदीस के सिवाय, शारीक से नहीं जानते। उ कहिन, 'मैंने मुहम्मद से ई हदीस के बारे मा पूछा, लेकिन उ भी याह्या बिन आदम शरीक के हदीस के अलावा ई नाहीं जानत रहे। मुहम्मद कहिन, 'न केवल केहू शरीक से, अम्मर से, अबू अज जुबैर से, जाबिर से रिवायित किहिस है कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम काला इमामत पहिन के मक्का मा घुसे रहे'। मुहम्मद ने कहा कि कौन सी हदीस? दरअसल ई हदीस है'। अबू ईसा ने कहा, 'अद दुहनु - जनजाति का नाम - बजिला - जनजाति का नाम - से आया है। और अम्मर अद दुहनी अम्मर बिन मुआविया अद दुहनी है, उनका उपनाम अबू मुआविया है। उ एक अइसन मनई अहै जवन कूफा से आवा अहै अऊर हदीस विशेषज्ञन के अनुसार त्सीकाह - भरोसेमंद अहै।