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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Shalat sunnah wudhu dua rakaat (menjelang shubuh), dan berdoa setelah wudhu maka akan dibukakan baginya delapa pintu Syurga

Imam Bukhari : 155

حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الْأُوَيْسِيُّ قَالَ حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ أَنَّ عَطَاءَ بْنَ يَزِيدَ أَخْبَرَهُ أَنَّ حُمْرَانَ مَوْلَى عُثْمَانَ أَخْبَرَهُ أَنَّهُ رَأَى عُثْمَانَ بْنَ عَفَّانَدَعَا بِإِنَاءٍ فَأَفْرَغَ عَلَى كَفَّيْهِ ثَلَاثَ مِرَارٍ فَغَسَلَهُمَا ثُمَّ أَدْخَلَ يَمِينَهُ فِي الْإِنَاءِ فَمَضْمَضَ وَاسْتَنْشَقَ ثُمَّ غَسَلَ وَجْهَهُ ثَلَاثًا وَيَدَيْهِ إِلَى الْمِرْفَقَيْنِ ثَلَاثَ مِرَارٍ ثُمَّ مَسَحَ بِرَأْسِهِ ثُمَّ غَسَلَ رِجْلَيْهِ ثَلَاثَ مِرَارٍ إِلَى الْكَعْبَيْنِ ثُمَّ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ تَوَضَّأَ نَحْوَ وُضُوئِي هَذَا ثُمَّ صَلَّى رَكْعَتَيْنِ لَا يُحَدِّثُ فِيهِمَا نَفْسَهُ غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِوَعَنْ إِبْرَاهِيمَ قَالَ قَالَ صَالِحُ بْنُ كَيْسَانَ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ وَلَكِنْ عُرْوَةُ يُحَدِّثُ عَنْ حُمْرَانَ فَلَمَّا تَوَضَّأَ عُثْمَانُ قَالَ أَلَا أُحَدِّثُكُمْ حَدِيثًا لَوْلَا آيَةٌ مَا حَدَّثْتُكُمُوهُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ لَا يَتَوَضَّأُ رَجُلٌ يُحْسِنُ وُضُوءَهُ وَيُصَلِّي الصَّلَاةَ إِلَّا غُفِرَ لَهُ مَا بَيْنَهُ وَبَيْنَ الصَّلَاةِ حَتَّى يُصَلِّيَهَا قَالَ عُرْوَةُ الْآيَةَ{ إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنْزَلْنَا مِنْ الْبَيِّنَاتِ }

हमरा सब स रिवायत अछि [अब्दुल अजीज बिन अब्दुल्लाह अल उवैसी] कहलनि, [इब्राहिम बिन स'द] हमरा [शिहाब] स रिवायत केलनि जे ['अता' बिन यजीद] हुनका रिपोर्ट केलनि जे [हुमरान] उस्मान के पूर्व बेटी हुनका रिपोर्ट केलनि, जे ओ ['उस्मान बिन अफ्फान] के एकटा बर्तन मांगैत देखने छलीह - जे पानि स भरल छल -. फेर तीन बेर हथेली पर ढारि दुनू केँ धो लेलक, फेर दहिना हाथ बर्तन मे राखि मुँह कुल्ला क नाक मे पानि देलक, फेर तीन बेर मुँह धोलक, फेर तीन बेर दुनू हाथ कोहनी धरि धोलक, फेर माथ पोछलक, फेर दुनू पैर तीन बेर टखने धरि धोलक। एकर बाद ओ कहलनि जे, रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहलनि जे, जे कियो एहि तरहे वज़ूद करत, फेर दू रकाअत के नमाज पढ़त आ दुनूक बीच बात नहि करत, ओकर पूर्वक पाप माफ भ जायत। आ [इब्राहिम] सँ कहलनि जे, [सालिह बिन कैसन] कहलनि, [इब्न शिहाब] कहलनि। लेकिन [उर्वाह] [हुमरान] स॑ रिवायत छै, ‘जब॑ [उस्मान] वज़ूद करलकै त॑ कहलकै, ‘की हम्में तोरा सिनी क॑ ऐसनऽ हदीस नै पहुँचाबै जे अगर कोनो आयत नै रहतै त॑ हम्में ओकरा नै पहुँचायितियै? हम एक बेर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के कहने सुनने रही: 'कोनो एहन आदमी नै छै जे वज़ूद करै छै आ फेर नमाज करै छै, सिवाय ई जे ओकर वज़ूद आ ओकर नमाज के बीच के पाप माफ भ जायत जाबे तक नमाज पूरा नै भ जायत।' 'उरवाह कहलक, 'प्रश्न श्लोक अछि: '-सत्ते ओ लोकनि जे हमरा लोकनिक प्रकटीकरण केँ नुकाबैत छथि...-' -प्र.स. अल बकरा : 159-।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 395, 402, 550, 995, 1137, 1255, 1279, 1907, 2291, 3126, 6923, 6999, 7405, 7419, 7731, 7847, 8223, 8843, 10300, 15785, 15836, 15850, 15864, 15872, 15876, 17172, 17469, 18063, 18064, 18217, 18218, 18221, 23956, 24239
Imam Bukhari : 137, 155, 156, 157, 159, 179, 180, 184, 185, 3052
Imam Muslim : 331, 347, 348, 349, 350, 351
Imam Abu Dawud : 120, 121, 122, 123, 2019
Imam Tirmidzi : 26, 45, 718
Imam Nasa'i : 83, 84, 85, 86, 87, 88, 89, 90, 91, 92, 94, 96, 97, 98, 99, 100, 101, 102, 114
Imam Ibnu Majah : 397, 398, 399, 400, 401, 402, 403, 428
Imam Malik : 30, 31
Imam Darimi : 693, 696, 697, 703, 740