Imam Bukhari : 1
حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الزُّبَيْرِ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْأَنْصَارِيُّ قَالَ أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيُّ أَنَّهُ سَمِعَ عَلْقَمَةَ بْنَ وَقَّاصٍ اللَّيْثِيَّ يَقُولُ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَلَى الْمِنْبَرِقَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ إِنَّمَا الْأَعْمَالُ بِالنِّيَّاتِ وَإِنَّمَا لِكُلِّ امْرِئٍ مَا نَوَى فَمَنْ كَانَتْ هِجْرَتُهُ إِلَى دُنْيَا يُصِيبُهَا أَوْ إِلَى امْرَأَةٍ يَنْكِحُهَا فَهِجْرَتُهُ إِلَى مَا هَاجَرَ إِلَيْهِ
हमरा सभकेँ [अल हुमैदी अब्दुल्लाह बिन अज़ जुबैर] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [सुफयान] कहलक अछि जे कहलक, जे हमरा सभकेँ [याह्या बिन सईद अल अंसारी] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [मुहम्मद बिन इब्राहिम अत तैमी] कहलक अछि, जे ओ [अलकामा बिन वकाश अल लैत्सी] कहैत सुनने अछि; हम एक बेर [उमर बिन अल खथथब] के मंच पर कहैत सुनने रही; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनने रही जे सब काज नियत पर निर्भर करैत अछि, आ प्रत्येक व्यक्ति के इनाम एहि बात पर निर्भर करैत अछि जे इरादा की छल; जे कियो जाहि दुनिया मे पहुँचय चाहैत अछि वा कोनो महिलाक कारणेँ प्रवास करबाक इरादा रखैत अछि जे ओकर विवाह करय चाहैत अछि, तखन ओकर प्रवास ओहि दिस होइत छैक जकर इरादा छलैक।'
Imam Bukhari : 2
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا أَنَّ الْحَارِثَ بْنَ هِشَامٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ سَأَلَ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ يَأْتِيكَ الْوَحْيُ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَحْيَانًا يَأْتِينِي مِثْلَ صَلْصَلَةِ الْجَرَسِ وَهُوَ أَشَدُّهُ عَلَيَّ فَيُفْصَمُ عَنِّي وَقَدْ وَعَيْتُ عَنْهُ مَا قَالَ وَأَحْيَانًا يَتَمَثَّلُ لِي الْمَلَكُ رَجُلًا فَيُكَلِّمُنِي فَأَعِي مَا يَقُولُ قَالَتْ عَائِشَةُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا وَلَقَدْ رَأَيْتُهُ يَنْزِلُ عَلَيْهِ الْوَحْيُ فِي الْيَوْمِ الشَّدِيدِ الْبَرْدِ فَيَفْصِمُ عَنْهُ وَإِنَّ جَبِينَهُ لَيَتَفَصَّدُ عَرَقًا
हमरा सब स रिवायत अछि जे [अब्दुल्लाह बिन यूसुफ] कहलनि, [मलिक] हमरा सब स [हिशाम बिन उर्वाह] स [अपन पिता] स [आइशा] स मुसलमान क मां स रिवायत केलथि, जे अल हरित बिन हिशाम अल्लाह क रसूलुल्लाह (स.अ.व. अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) जवाब देलखिन: 'कखनो काल हमरा लग घंटी बजबाक आवाज जकाँ अबैत अछि, आ ई हमरा लेल सबसँ कठिन तरीका अछि, तखन ई रुकि जाइत अछि जाहि सँ हम बुझि सकब जे की संप्रेषित भ' रहल अछि।' आ कखनो काल कोनो स्वर्गदूत मनुक्खक रूप मे आबि हमरा सँ गप्प करैत छथि, तेँ हम हुनकर कहबक पालन करैत छी।' ऐशा बजलीह: 'सत्ते, हम एक बेर बहुत ठंढा दिन हुनका (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर वही उतरैत देखलहुँ, तखन ओ रुकि गेल, आ देखलहुँ जे हुनकर कपार सँ पसीना बहैत छल।'
Imam Bukhari : 3
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ أَنَّهَا قَالَتْأَوَّلُ مَا بُدِئَ بِهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْ الْوَحْيِ الرُّؤْيَا الصَّالِحَةُ فِي النَّوْمِ فَكَانَ لَا يَرَى رُؤْيَا إِلَّا جَاءَتْ مِثْلَ فَلَقِ الصُّبْحِ ثُمَّ حُبِّبَ إِلَيْهِ الْخَلَاءُ وَكَانَ يَخْلُو بِغَارِ حِرَاءٍ فَيَتَحَنَّثُ فِيهِ وَهُوَ التَّعَبُّدُ اللَّيَالِيَ ذَوَاتِ الْعَدَدِ قَبْلَ أَنْ يَنْزِعَ إِلَى أَهْلِهِ وَيَتَزَوَّدُ لِذَلِكَ ثُمَّ يَرْجِعُ إِلَى خَدِيجَةَ فَيَتَزَوَّدُ لِمِثْلِهَا حَتَّى جَاءَهُ الْحَقُّ وَهُوَ فِي غَارِ حِرَاءٍ فَجَاءَهُ الْمَلَكُ فَقَالَ اقْرَأْ قَالَ مَا أَنَا بِقَارِئٍ قَالَ فَأَخَذَنِي فَغَطَّنِي حَتَّى بَلَغَ مِنِّي الْجَهْدَ ثُمَّ أَرْسَلَنِي فَقَالَ اقْرَأْ قُلْتُ مَا أَنَا بِقَارِئٍ فَأَخَذَنِي فَغَطَّنِي الثَّانِيَةَ حَتَّى بَلَغَ مِنِّي الْجَهْدَ ثُمَّ أَرْسَلَنِي فَقَالَ اقْرَأْ فَقُلْتُ مَا أَنَا بِقَارِئٍ فَأَخَذَنِي فَغَطَّنِي الثَّالِثَةَ ثُمَّ أَرْسَلَنِي فَقَالَ{ اقْرَأْ بِاسْمِ رَبِّكَ الَّذِي خَلَقَ خَلَقَ الْإِنْسَانَ مِنْ عَلَقٍ اقْرَأْ وَرَبُّكَ الْأَكْرَمُ }فَرَجَعَ بِهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَرْجُفُ فُؤَادُهُ فَدَخَلَ عَلَى خَدِيجَةَ بِنْتِ خُوَيْلِدٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا فَقَالَ زَمِّلُونِي زَمِّلُونِي فَزَمَّلُوهُ حَتَّى ذَهَبَ عَنْهُ الرَّوْعُ فَقَالَ لِخَدِيجَةَ وَأَخْبَرَهَا الْخَبَرَ لَقَدْ خَشِيتُ عَلَى نَفْسِي فَقَالَتْ خَدِيجَةُ كَلَّا وَاللَّهِ مَا يُخْزِيكَ اللَّهُ أَبَدًا إِنَّكَ لَتَصِلُ الرَّحِمَ وَتَحْمِلُ الْكَلَّ وَتَكْسِبُ الْمَعْدُومَ وَتَقْرِي الضَّيْفَ وَتُعِينُ عَلَى نَوَائِبِ الْحَقِّ فَانْطَلَقَتْ بِهِ خَدِيجَةُ حَتَّى أَتَتْ بِهِ وَرَقَةَ بْنَ نَوْفَلِ بْنِ أَسَدِ بْنِ عَبْدِ الْعُزَّى ابْنَ عَمِّ خَدِيجَةَ وَكَانَ امْرَأً قَدْ تَنَصَّرَ فِي الْجَاهِلِيَّةِ وَكَانَ يَكْتُبُ الْكِتَابَ الْعِبْرَانِيَّ فَيَكْتُبُ مِنْ الْإِنْجِيلِ بِالْعِبْرَانِيَّةِ مَا شَاءَ اللَّهُ أَنْ يَكْتُبَ وَكَانَ شَيْخًا كَبِيرًا قَدْ عَمِيَ فَقَالَتْ لَهُ خَدِيجَةُ يَا ابْنَ عَمِّ اسْمَعْ مِنْ ابْنِ أَخِيكَ فَقَالَ لَهُ وَرَقَةُ يَا ابْنَ أَخِي مَاذَا تَرَى فَأَخْبَرَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَبَرَ مَا رَأَى فَقَالَ لَهُ وَرَقَةُ هَذَا النَّامُوسُ الَّذِي نَزَّلَ اللَّهُ عَلَى مُوسَى يَا لَيْتَنِي فِيهَا جَذَعًا لَيْتَنِي أَكُونُ حَيًّا إِذْ يُخْرِجُكَ قَوْمُكَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوَمُخْرِجِيَّ هُمْ قَالَ نَعَمْ لَمْ يَأْتِ رَجُلٌ قَطُّ بِمِثْلِ مَا جِئْتَ بِهِ إِلَّا عُودِيَ وَإِنْ يُدْرِكْنِي يَوْمُكَ أَنْصُرْكَ نَصْرًا مُؤَزَّرًا ثُمَّ لَمْ يَنْشَبْ وَرَقَةُ أَنْ تُوُفِّيَ وَفَتَرَ الْوَحْيُقَالَ ابْنُ شِهَابٍ وَأَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ أَنَّ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ الْأَنْصَارِيَّ قَالَ وَهُوَ يُحَدِّثُ عَنْ فَتْرَةِ الْوَحْيِ فَقَالَ فِي حَدِيثِهِ بَيْنَا أَنَا أَمْشِي إِذْ سَمِعْتُ صَوْتًا مِنْ السَّمَاءِ فَرَفَعْتُ بَصَرِي فَإِذَا الْمَلَكُ الَّذِي جَاءَنِي بِحِرَاءٍ جَالِسٌ عَلَى كُرْسِيٍّ بَيْنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ فَرُعِبْتُ مِنْهُ فَرَجَعْتُ فَقُلْتُ زَمِّلُونِي زَمِّلُونِي فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى{ يَا أَيُّهَا الْمُدَّثِّرُ قُمْ فَأَنْذِرْ إِلَى قَوْلِهِ وَالرُّجْزَ فَاهْجُرْ }فَحَمِيَ الْوَحْيُ وَتَتَابَعَ تَابَعَهُ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ وَأَبُو صَالِحٍ وَتَابَعَهُ هِلَالُ بْنُ رَدَّادٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ وَقَالَ يُونُسُ وَمَعْمَرٌ بَوَادِرُهُ
हमरा सब के [याह्या बिन बुकैर] कहलक अछि, हमरा सब के [अल लैतस] स [उकाइल] स [इब्न शिहाब] स ['उरवाह बिन अज़ जुबैर] स [ऐस्याह] -मु'मिनिन के मां- स कहल गेल अछि, जे ओ कहलनि: 'रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहिलम के पास जे वहही आयल छल ओकर शुरुआत एकटा सच्चाई के संग छल नींद मे सपना देखब। आ ओ सपना ताबत धरि नहि देखैत छथि जाबत भोरक इजोत जकाँ नहि अबैत अछि । तखन ओकरा एकांत प्रेमक आशीर्वाद भेटलैक, तेँ ओ हिरोक गुफा चुनि ओकरा सहलक, अर्थात किछु समय धरि राति मे पूजा केलक आ फेर अपन परिवार मे वापस आबि फेर सँ जीवित रहबाक प्रावधान तैयार केलक। तखन खदीजासँ भेंट भ’ गेलाह भोजन तैयार करबाक लेल। जाबे अंततः अल हक हिरो के गुफा में छल तखन तक एकटा परी आबि कहलक: 'पढ़ू?' ओ उत्तर देलनि: 'हम पढ़ि नहि सकैत छी'। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बतौलनि: त स्वर्गदूत हमरा पकड़ि लेलक आ हमरा बहुत जोर स गला लगा लेलक फेर हमरा छोड़ि देलक आ फेर कहलक: 'पढ़ू!' ओ उत्तर देलनि: 'हम पढ़ि नहि सकैत छी'। अस्तु, परी हमरा पकड़ि कए बहुत जोर स गला लगा लेलक फेर हमरा छोड़ि देलक आ फेर कहलक: 'पढ़ू!'। ओ उत्तर देलनि: 'हम पढ़ि नहि सकैत छी'। स्वर्गदूत हमरा फेर पकड़ि लेलक आ तेसर बेर हमरा बहुत जोर सँ गला लगा लेलक तखन हमरा छोड़ि देलक, आ फेर कहलक: -अपन भगवानक नाम -उल्लेख- क' क' पढ़ू जे सृष्टि केने छलाह, ओ खूनक थक्का सँ मनुक्ख केँ बनौने छथि | पढ़ू, आ अहाँक प्रभु परम कृपालु छथि-'। नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बेचैन अवस्था में वही के वचन के साथ अपने परिवार में वापस आ गया | खदीजा बिन खवैलिध सँ भेंट केलनि आ कहलनि: 'हमरा झाँपि दियौक, हमरा झाँपि दियौक!'. जाबे तक ओकर डर नै छूटि गेलै ताबे तक ओ लिफाफमे रहि गेल। तखन खदीजा केँ जे भेलै से कहलखिन: 'हमरा अपन चिन्ता अछि'। त खदीजा कहलखिन: 'अल्लाह के कसम, अल्लाह अहाँ के हमेशा के लेल नुकसान नै पहुंचाओत, कियाक त अहाँ दोस्ती जारी रखनिहार व्यक्ति छी'। एकरऽ बाद खदीजा न॑ ओकरा खदीजा केरऽ चाचा केरऽ बेटा वारोकोह बिन नौफल बिन असद बिन अब्दुल उज्जा स॑ मिलै लेली आमंत्रित करलकै, जे जहिलिया युग म॑ ईसाई छेलै । हिब्रू में किताब भी लिखलकै, आरू अल्लाह के अनुमति के साथ हिब्रू में बाइबिल भी लिखलकै। ओहि समय वारोकोह बूढ़ भ गेल छल आ ओकर आँखि आन्हर भ गेल छल । खदीजा कहलखिन: 'हे हमर काका बेटा, सुनू जे अहाँक भाइक बेटा के की कहब छनि'। वारोकोह कहलकै: 'हे हमर भाई के बेटा, तोरा की अनुभव भेलै'। त रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका संग की भेलनि से बतौलनि। वारोकोह कहलकै: 'ई नमुस छै, जेना कि अल्लाह एक बेर मूसा के सामने खुलासा केने छेलै। ओह, काश हम एखनो छोट रहितहुँ आ हम एखनो जीवित रहितहुँ जखन अहाँ केँ अहाँक लोक द्वारा भगा देल गेल छल'। रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पुछलखिन: की हमरा हुनका सब द्वारा बाहर फेंकल जायत? वारोकोह उत्तर देलक: 'हँ।' कारण जे अहाँ जे आनि रहल छी से कियो ताबत धरि नहि आओत जाबत धरि ओकरा चोट नहि लागत - दुश्मन बनाओल जायत -। ओहि घटनाक समय जँ हम उपस्थित रहितहुँ तऽ हम अहाँक सामर्थ्यक अनुसार मददि करितहुँ । वारोकोह केॅ वू घटना के अनुभव नै होलै जेकरा में वू विश्वास करै छेलै, कैन्हेंकि प्रकटीकरण के फतरोह - खालीपन - के दौरान ओकरऽ मौत पहलें होय गेलऽ छेलै । [इब्न सिहाब] कहलनि; हमरा [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान] के सूचित केने छथि जे [जाबिर बिन अब्दुल्लाह अल अंशरी] वही के खालीपन के बारे में बजने छलाह, जेना कि अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लाह अलैहि वसल्लम के रिवायत छनि: 'जखन हम चलैत छलहुं तखन हम आकाश सं एकटा आवाज सुनलहुं, हम ओहि दिस तकलहुं आ ई ओ स्वर्गदूत छलाह जे हिरो के गुफा में हमरा लग आयल छलाह, बीच में एकटा कुर्सी पर बैसल छलाह.' आकाश आ पृथ्वी। हम डरि गेलहुँ आ घर चलि गेलहुँ, आ कहलियनि: ‘हमरा झाँपि दियौक। हमरा झाँपि दियौक।' त अल्लाह तआला वहही उतारलनि : -हे अहाँ जे ढकने छी- जा धरि अल्लाह के वचन नहि -आ मूर्ति छोड़ि-। तहिया सँ प्रकटीकरण निरंतर उतरैत रहल अछि।' ई हदीस [अब्दुल्लाह बिन यूसुफ] आरू [अबू सालिह] आरू [हिलाल बिन रद्दाद] न॑ भी [अज जुहरी] स॑ भी बतैन॑ छै । आ [युनुस] कहलनि; आ [मा'मार] सहमत भ' गेल जे ओकरा अज ज़ुहरी सँ भेटल छैक।
Imam Bukhari : 4
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ قَالَ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ أَبِي عَائِشَةَ قَالَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍفِي قَوْلِهِ تَعَالَى{ لَا تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ }قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعَالِجُ مِنْ التَّنْزِيلِ شِدَّةً وَكَانَ مِمَّا يُحَرِّكُ شَفَتَيْهِ فَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ فَأَنَا أُحَرِّكُهُمَا لَكُمْ كَمَا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُحَرِّكُهُمَا وَقَالَ سَعِيدٌ أَنَا أُحَرِّكُهُمَا كَمَا رَأَيْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ يُحَرِّكُهُمَا فَحَرَّكَ شَفَتَيْهِ فَأَنْزَلَ اللَّهُ تَعَالَى{ لَا تُحَرِّكْ بِهِ لِسَانَكَ لِتَعْجَلَ بِهِ إِنَّ عَلَيْنَا جَمْعَهُ وَقُرْآنَهُ }قَالَ جَمْعُهُ لَكَ فِي صَدْرِكَ وَتَقْرَأَهُ{ فَإِذَا قَرَأْنَاهُ فَاتَّبِعْ قُرْآنَهُ }قَالَ فَاسْتَمِعْ لَهُ وَأَنْصِتْ{ ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا بَيَانَهُ }ثُمَّ إِنَّ عَلَيْنَا أَنْ تَقْرَأَهُ فَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَعْدَ ذَلِكَ إِذَا أَتَاهُ جِبْرِيلُ اسْتَمَعَ فَإِذَا انْطَلَقَ جِبْرِيلُ قَرَأَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَمَا قَرَأَهُ
हमरा सभकेँ [मूसा बिन इस्माइल] कहलक अछि, हमरा सभकेँ कहलक अछि [अबू अवानाह] कहलक अछि, जे हमरा सभकेँ [मूसा बिन अबू ऐसियाह] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [सैद बिन जुबैर] [इब्न अब्बास]सँ अल्लाह तआला केर वचनक विषयमे बतौने अछि: -कुरान -पढ़बाक- लेल अपन जीह नहि हिलाउ किएक तँ अहाँ सभ जल्दीए -एकरा मालिक बनब-' चाहब। इब्न अब्बास कहलनि: 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बहुत प्रबल इच्छा छल जे जे किछु प्रकट भेल छल - कुरान - रटय आ अपन ठोर हिला देलक'। इब्न अब्बास कहलनि: 'हम अपन ठोर हिला देब -एकरा पढ़य लेल- जेना अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमरा संग केने छलाह'। सईद कहलनि: 'आ हम अपन ठोर हिला देब -पढ़बाक लेल- अहाँ केँ जेना हम इब्न अब्बास केँ करैत देखलहुँ।' त नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपन ठोर हिला देलनि। तखन अल्लाह तआला के वचन उतरल जे कुरान के -पढ़य लेल जीभ नहि हिलाउ किएक त अहाँ जल्दीए एहि पर -माहिर भ जायब। सचमुच, ई हमरा लोकनिक खर्च पर अछि जे एकरा सभ केँ -अहाँक कोरा मे- संग्रहित करी आ -अहाँ केँ चतुर बनाबी- पढ़बा मे'। एकरऽ मतलब ई छै कि अल्लाह एकरा तोरऽ छाती में जमा करी लै छै - रटै लेली - आरू ओकरा बाद तोहें पढ़ै छैं: 'जब॑ हम्में पढ़ी क॑ पूरा करी लेबै, त॑ पढ़ै के पालन करी लेबै' । एकर अर्थ होइत छैक : 'सुनू आ चुप रहू'। तखन अल्लाह तआला कहलनि: तखन, सचमुच, एकरा बुझेनाय हमरा सभक काज अछि। एकरऽ मतलब छै : ‘आरू एकरऽ पढ़ना हमरऽ फर्ज छै’ आरू अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वू समय स॑ जब॑ जिब्रिल अलैहिस सलाम हुनका पास ऐलै त॑ हुनकऽ बात सुनलकै । आ जखन जिब्रिल अलैहिस सलाम चलि गेलाह तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पढ़लनि - अपन साथी सभ केँ - जेना जिब्रिल अलैहिस सलाम हुनका सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पढ़लनि
Imam Bukhari : 5
حَدَّثَنَا عَبْدَانُ قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ قَالَ أَخْبَرَنَا يُونُسُ عَنْ الزُّهْرِيِّ ح و حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مُحَمَّدٍ قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ قَالَ أَخْبَرَنَا يُونُسُ وَمَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ نَحْوَهُ قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَجْوَدَ النَّاسِ وَكَانَ أَجْوَدُ مَا يَكُونُ فِي رَمَضَانَ حِينَ يَلْقَاهُ جِبْرِيلُ وَكَانَ يَلْقَاهُ فِي كُلِّ لَيْلَةٍ مِنْ رَمَضَانَ فَيُدَارِسُهُ الْقُرْآنَ فَلَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَجْوَدُ بِالْخَيْرِ مِنْ الرِّيحِ الْمُرْسَلَةِ
हमरा सभकेँ [अब्दान] कहलक अछि, हमरा सभकेँ कहलक अछि [अब्दुल्लाह] हमरा सभकेँ [यूनुस]केँ [अज ज़ुह्री]सँ कहलक अछि आ ओही रिवाजसँ, हमरा सभकेँ सेहो कहलक अछि [बिसीर बिन मुहम्मद] कहलक, हमरा सभकेँ [अब्दुल्लाह] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [यूनुस] आ [मा'मर]सँ [अज जुहरी]सँ कहलक अछि जेना कि दोसर सभ कहलक अछि, हमरा सभकेँ [उबैदुल्लाह बिन] कहलक अछि अब्दुल्लाह] स॑ [इब्न अब्बास] न॑ कहलकै, कि रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सबसें कोमल इंसान छेलै, खास करी क॑ रमदलान के महीना म॑ जब॑ फरिश्ता जिब्रिल अलैहिस सलाम हुनका स॑ मिललऽ छेलै, आरू ई जिब्रिल अलैहिस सलाम छेलै जे रमदलान के महीना म॑ हर रात हुनका पास आबै छेलै, जहाँ जिब्रिल अलैहिस सलाम कुरान सिखाबै छेलै । सचमुच रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बहैत हवा स बहुत कोमल छलाह।
Imam Bukhari : 6
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ الْحَكَمُ بْنُ نَافِعٍ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ مَسْعُودٍ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عَبَّاسٍ أَخْبَرَهُ أَنَّ أَبَا سُفْيَانَ بْنَ حَرْبٍ أَخْبَرَهُأَنَّ هِرَقْلَ أَرْسَلَ إِلَيْهِ فِي رَكْبٍ مِنْ قُرَيْشٍ وَكَانُوا تِجَارًا بِالشَّأْمِ فِي الْمُدَّةِ الَّتِي كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَادَّ فِيهَا أَبَا سُفْيَانَ وَكُفَّارَ قُرَيْشٍ فَأَتَوْهُ وَهُمْ بِإِيلِيَاءَ فَدَعَاهُمْ فِي مَجْلِسِهِ وَحَوْلَهُ عُظَمَاءُ الرُّومِ ثُمَّ دَعَاهُمْ وَدَعَا بِتَرْجُمَانِهِ فَقَالَ أَيُّكُمْ أَقْرَبُ نَسَبًا بِهَذَا الرَّجُلِ الَّذِي يَزْعُمُ أَنَّهُ نَبِيٌّ فَقَالَ أَبُو سُفْيَانَ فَقُلْتُ أَنَا أَقْرَبُهُمْ نَسَبًا فَقَالَ أَدْنُوهُ مِنِّي وَقَرِّبُوا أَصْحَابَهُ فَاجْعَلُوهُمْ عِنْدَ ظَهْرِهِ ثُمَّ قَالَ لِتَرْجُمَانِهِ قُلْ لَهُمْ إِنِّي سَائِلٌ هَذَا عَنْ هَذَا الرَّجُلِ فَإِنْ كَذَبَنِي فَكَذِّبُوهُ فَوَاللَّهِ لَوْلَا الْحَيَاءُ مِنْ أَنْ يَأْثِرُوا عَلَيَّ كَذِبًا لَكَذَبْتُ عَنْهُ ثُمَّ كَانَ أَوَّلَ مَا سَأَلَنِي عَنْهُ أَنْ قَالَ كَيْفَ نَسَبُهُ فِيكُمْ قُلْتُ هُوَ فِينَا ذُو نَسَبٍ قَالَ فَهَلْ قَالَ هَذَا الْقَوْلَ مِنْكُمْ أَحَدٌ قَطُّ قَبْلَهُ قُلْتُ لَا قَالَ فَهَلْ كَانَ مِنْ آبَائِهِ مِنْ مَلِكٍ قُلْتُ لَا قَالَ فَأَشْرَافُ النَّاسِ يَتَّبِعُونَهُ أَمْ ضُعَفَاؤُهُمْ فَقُلْتُ بَلْ ضُعَفَاؤُهُمْ قَالَ أَيَزِيدُونَ أَمْ يَنْقُصُونَ قُلْتُ بَلْ يَزِيدُونَ قَالَ فَهَلْ يَرْتَدُّ أَحَدٌ مِنْهُمْ سَخْطَةً لِدِينِهِ بَعْدَ أَنْ يَدْخُلَ فِيهِ قُلْتُ لَا قَالَ فَهَلْ كُنْتُمْ تَتَّهِمُونَهُ بِالْكَذِبِ قَبْلَ أَنْ يَقُولَ مَا قَالَ قُلْتُ لَا قَالَ فَهَلْ يَغْدِرُ قُلْتُ لَا وَنَحْنُ مِنْهُ فِي مُدَّةٍ لَا نَدْرِي مَا هُوَ فَاعِلٌ فِيهَا قَالَ وَلَمْ تُمْكِنِّي كَلِمَةٌ أُدْخِلُ فِيهَا شَيْئًا غَيْرُ هَذِهِ الْكَلِمَةِ قَالَ فَهَلْ قَاتَلْتُمُوهُ قُلْتُ نَعَمْ قَالَ فَكَيْفَ كَانَ قِتَالُكُمْ إِيَّاهُ قُلْتُ الْحَرْبُ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُ سِجَالٌ يَنَالُ مِنَّا وَنَنَالُ مِنْهُ قَالَ مَاذَا يَأْمُرُكُمْ قُلْتُ يَقُولُ اعْبُدُوا اللَّهَ وَحْدَهُ وَلَا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا وَاتْرُكُوا مَا يَقُولُ آبَاؤُكُمْ وَيَأْمُرُنَا بِالصَّلَاةِ وَالزَّكَاةِ وَالصِّدْقِ وَالْعَفَافِ وَالصِّلَةِ فَقَالَ لِلتَّرْجُمَانِ قُلْ لَهُ سَأَلْتُكَ عَنْ نَسَبِهِ فَذَكَرْتَ أَنَّهُ فِيكُمْ ذُو نَسَبٍ فَكَذَلِكَ الرُّسُلُ تُبْعَثُ فِي نَسَبِ قَوْمِهَا وَسَأَلْتُكَ هَلْ قَالَ أَحَدٌ مِنْكُمْ هَذَا الْقَوْلَ فَذَكَرْتَ أَنْ لَا فَقُلْتُ لَوْ كَانَ أَحَدٌ قَالَ هَذَا الْقَوْلَ قَبْلَهُ لَقُلْتُ رَجُلٌ يَأْتَسِي بِقَوْلٍ قِيلَ قَبْلَهُ وَسَأَلْتُكَ هَلْ كَانَ مِنْ آبَائِهِ مِنْ مَلِكٍ فَذَكَرْتَ أَنْ لَا قُلْتُ فَلَوْ كَانَ مِنْ آبَائِهِ مِنْ مَلِكٍ قُلْتُ رَجُلٌ يَطْلُبُ مُلْكَ أَبِيهِ وَسَأَلْتُكَ هَلْ كُنْتُمْ تَتَّهِمُونَهُ بِالْكَذِبِ قَبْلَ أَنْ يَقُولَ مَا قَالَ فَذَكَرْتَ أَنْ لَا فَقَدْ أَعْرِفُ أَنَّهُ لَمْ يَكُنْ لِيَذَرَ الْكَذِبَ عَلَى النَّاسِ وَيَكْذِبَ عَلَى اللَّهِ وَسَأَلْتُكَ أَشْرَافُ النَّاسِ اتَّبَعُوهُ أَمْ ضُعَفَاؤُهُمْ فَذَكَرْتَ أَنَّ ضُعَفَاءَهُمْ اتَّبَعُوهُ وَهُمْ أَتْبَاعُ الرُّسُلِ وَسَأَلْتُكَ أَيَزِيدُونَ أَمْ يَنْقُصُونَ فَذَكَرْتَ أَنَّهُمْ يَزِيدُونَ وَكَذَلِكَ أَمْرُ الْإِيمَانِ حَتَّى يَتِمَّ وَسَأَلْتُكَ أَيَرْتَدُّ أَحَدٌ سَخْطَةً لِدِينِهِ بَعْدَ أَنْ يَدْخُلَ فِيهِ فَذَكَرْتَ أَنْ لَا وَكَذَلِكَ الْإِيمَانُ حِينَ تُخَالِطُ بَشَاشَتُهُ الْقُلُوبَ وَسَأَلْتُكَ هَلْ يَغْدِرُ فَذَكَرْتَ أَنْ لَا وَكَذَلِكَ الرُّسُلُ لَا تَغْدِرُ وَسَأَلْتُكَ بِمَا يَأْمُرُكُمْ فَذَكَرْتَ أَنَّهُ يَأْمُرُكُمْ أَنْ تَعْبُدُوا اللَّهَ وَلَا تُشْرِكُوا بِهِ شَيْئًا وَيَنْهَاكُمْ عَنْ عِبَادَةِ الْأَوْثَانِ وَيَأْمُرُكُمْ بِالصَّلَاةِ وَالصِّدْقِ وَالْعَفَافِ فَإِنْ كَانَ مَا تَقُولُ حَقًّا فَسَيَمْلِكُ مَوْضِعَ قَدَمَيَّ هَاتَيْنِ وَقَدْ كُنْتُ أَعْلَمُ أَنَّهُ خَارِجٌ لَمْ أَكُنْ أَظُنُّ أَنَّهُ مِنْكُمْ فَلَوْ أَنِّي أَعْلَمُ أَنِّي أَخْلُصُ إِلَيْهِ لَتَجَشَّمْتُ لِقَاءَهُ وَلَوْ كُنْتُ عِنْدَهُ لَغَسَلْتُ عَنْ قَدَمِهِ ثُمَّ دَعَا بِكِتَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الَّذِي بَعَثَ بِهِ دِحْيَةُ إِلَى عَظِيمِ بُصْرَى فَدَفَعَهُ إِلَى هِرَقْلَ فَقَرَأَهُ فَإِذَا فِيهِ بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ مِنْ مُحَمَّدٍ عَبْدِ اللَّهِ وَرَسُولِهِ إِلَى هِرَقْلَ عَظِيمِ الرُّومِ سَلَامٌ عَلَى مَنْ اتَّبَعَ الْهُدَى أَمَّا بَعْدُ فَإِنِّي أَدْعُوكَ بِدِعَايَةِ الْإِسْلَامِ أَسْلِمْ تَسْلَمْ يُؤْتِكَ اللَّهُ أَجْرَكَ مَرَّتَيْنِ فَإِنْ تَوَلَّيْتَ فَإِنَّ عَلَيْكَ إِثْمَ الْأَرِيسِيِّينَ وَ{ يَا أَهْلَ الْكِتَابِ تَعَالَوْا إِلَى كَلِمَةٍ سَوَاءٍ بَيْنَنَا وَبَيْنَكُمْ أَنْ لَا نَعْبُدَ إِلَّا اللَّهَ وَلَا نُشْرِكَ بِهِ شَيْئًا وَلَا يَتَّخِذَ بَعْضُنَا بَعْضًا أَرْبَابًا مِنْ دُونِ اللَّهِ فَإِنْ تَوَلَّوْا فَقُولُوا اشْهَدُوا بِأَنَّا مُسْلِمُونَ }قَالَ أَبُو سُفْيَانَ فَلَمَّا قَالَ مَا قَالَ وَفَرَغَ مِنْ قِرَاءَةِ الْكِتَابِ كَثُرَ عِنْدَهُ الصَّخَبُ وَارْتَفَعَتْ الْأَصْوَاتُ وَأُخْرِجْنَا فَقُلْتُ لِأَصْحَابِي حِينَ أُخْرِجْنَا لَقَدْ أَمِرَ أَمْرُ ابْنِ أَبِي كَبْشَةَ إِنَّهُ يَخَافُهُ مَلِكُ بَنِي الْأَصْفَرِ فَمَا زِلْتُ مُوقِنًا أَنَّهُ سَيَظْهَرُ حَتَّى أَدْخَلَ اللَّهُ عَلَيَّ الْإِسْلَامَ وَكَانَ ابْنُ النَّاظُورِ صَاحِبُ إِيلِيَاءَ وَهِرَقْلَ سُقُفًّا عَلَى نَصَارَى الشَّأْمِ يُحَدِّثُ أَنَّ هِرَقْلَ حِينَ قَدِمَ إِيلِيَاءَ أَصْبَحَ يَوْمًا خَبِيثَ النَّفْسِ فَقَالَ بَعْضُ بَطَارِقَتِهِ قَدْ اسْتَنْكَرْنَا هَيْئَتَكَ قَالَ ابْنُ النَّاظُورِ وَكَانَ هِرَقْلُ حَزَّاءً يَنْظُرُ فِي النُّجُومِ فَقَالَ لَهُمْ حِينَ سَأَلُوهُ إِنِّي رَأَيْتُ اللَّيْلَةَ حِينَ نَظَرْتُ فِي النُّجُومِ مَلِكَ الْخِتَانِ قَدْ ظَهَرَ فَمَنْ يَخْتَتِنُ مِنْ هَذِهِ الْأُمَّةِ قَالُوا لَيْسَ يَخْتَتِنُ إِلَّا الْيَهُودُ فَلَا يُهِمَّنَّكَ شَأْنُهُمْ وَاكْتُبْ إِلَى مَدَايِنِ مُلْكِكَ فَيَقْتُلُوا مَنْ فِيهِمْ مِنْ الْيَهُودِ فَبَيْنَمَا هُمْ عَلَى أَمْرِهِمْ أُتِيَ هِرَقْلُ بِرَجُلٍ أَرْسَلَ بِهِ مَلِكُ غَسَّانَ يُخْبِرُ عَنْ خَبَرِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمَّا اسْتَخْبَرَهُ هِرَقْلُ قَالَ اذْهَبُوا فَانْظُرُوا أَمُخْتَتِنٌ هُوَ أَمْ لَا فَنَظَرُوا إِلَيْهِ فَحَدَّثُوهُ أَنَّهُ مُخْتَتِنٌ وَسَأَلَهُ عَنْ الْعَرَبِ فَقَالَ هُمْ يَخْتَتِنُونَ فَقَالَ هِرَقْلُ هَذَا مُلْكُ هَذِهِ الْأُمَّةِ قَدْ ظَهَرَ ثُمَّ كَتَبَ هِرَقْلُ إِلَى صَاحِبٍ لَهُ بِرُومِيَةَ وَكَانَ نَظِيرَهُ فِي الْعِلْمِ وَسَارَ هِرَقْلُ إِلَى حِمْصَ فَلَمْ يَرِمْ حِمْصَ حَتَّى أَتَاهُ كِتَابٌ مِنْ صَاحِبِهِ يُوَافِقُ رَأْيَ هِرَقْلَ عَلَى خُرُوجِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَنَّهُ نَبِيٌّ فَأَذِنَ هِرَقْلُ لِعُظَمَاءِ الرُّومِ فِي دَسْكَرَةٍ لَهُ بِحِمْصَ ثُمَّ أَمَرَ بِأَبْوَابِهَا فَغُلِّقَتْ ثُمَّ اطَّلَعَ فَقَالَ يَا مَعْشَرَ الرُّومِ هَلْ لَكُمْ فِي الْفَلَاحِ وَالرُّشْدِ وَأَنْ يَثْبُتَ مُلْكُكُمْ فَتُبَايِعُوا هَذَا النَّبِيَّ فَحَاصُوا حَيْصَةَ حُمُرِ الْوَحْشِ إِلَى الْأَبْوَابِ فَوَجَدُوهَا قَدْ غُلِّقَتْ فَلَمَّا رَأَى هِرَقْلُ نَفْرَتَهُمْ وَأَيِسَ مِنْ الْإِيمَانِ قَالَ رُدُّوهُمْ عَلَيَّ وَقَالَ إِنِّي قُلْتُ مَقَالَتِي آنِفًا أَخْتَبِرُ بِهَا شِدَّتَكُمْ عَلَى دِينِكُمْ فَقَدْ رَأَيْتُ فَسَجَدُوا لَهُ وَرَضُوا عَنْهُ فَكَانَ ذَلِكَ آخِرَ شَأْنِ هِرَقْلَرَوَاهُ صَالِحُ بْنُ كَيْسَانَ وَيُونُسُ وَمَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ
हमरा सभकेँ [अबू अल यमन अल हकम बिन नाफी’] कहलक अछि, हमरा सभकेँ [अज जुहरी]सँ [स्यूअइब] कहलक अछि जे हमरा [उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन उतबाह बिन मसूद] कहलक अछि जे [अब्दुल्लाह बिन अब्बास] ओकरा कहलक अछि जे [अबू सुफियान बिन हरब] ओकरा कहलक अछि; कि हेराक्लियस क॑ एगो कुरैश व्यापारिक समूह मिललै, जे सीरिया केरऽ भूमि केरऽ व्यापारिक अभियान प॑ छेलै जब॑ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आरू अबू सुफियन आरू कुरैश काफिरऽ के बीच समझौता लागू होय गेलऽ छेलै । जखन ओ सभ इलिया' मे रुकल तखन हेराक्लियस सँ हेराक्लियस सँ भेंट भेल जे ओकरा सभा मे संवाद मे आमंत्रित कयल जाय, जाहि समय मे हेराक्लियस रोमन गणमान्य लोकक संग एक संग छल | हेराक्लियस एकटा दुभाषियाक माध्यमे हुनका सभसँ गप्प केलनि। हेराक्लियस कहलकै; 'अहाँ मे सँ केकर पारिवारिक संबंध ओहि व्यक्ति सँ सबसँ बेसी नजदीक अछि जे अपना केँ नबी हेबाक दावा करैत अछि?'. अबू सुफियन कहलनि; तेँ हम उत्तर देलियनि; 'हमहीं छी जिनका संग सबसँ नजदीकी पारिवारिक संबंध अछि'। हेराक्लियस कहलकै; 'ओकरा हमरा आ ओकर संगी सभक सेहो नजदीक आनि दियौक'। तेँ ओ सभ कुरैशकेँ अबू सुफियानक पाछू राखि देलक। तखन हेराक्लियस अपन दुभाषियाक माध्यमे कहलनि: 'ओकरा कहि दियौक जे हम ओकरा सँ ओहि आदमीक विषय मे पूछलहुँ जे अपना केँ पैगम्बरक दावा करैत छल।' जँ ओ हमरासँ झूठ बाजैत अछि तँ अहाँ ओकरासँ झूठ बाजब'। अल्लाह के कसम, जँ झूठ बाजबाक आरोप सँ जे लाज नहि होइत जे ओ सब हमरा पर समतल क' दैत त' हम हुनका सँ झूठ बाजि दैतहुँ।' अबू सुफियन कहलनि; त सबस पहिने ओ हमरा स हुनका बारे मे पूछलथि - नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम - स: 'अहाँ सब मे हुनकर वंश के की स्थिति अछि?' हम उत्तर देलियनि : 'ओ नीक - कुलीन - वंशक छथि' । ओ फेर पुछलखिन: 'हुनका सँ पहिने कियो आओर कहने अछि?' हम उत्तर देलियनि: 'किछु नहि'। ओ फेर पुछलखिन: 'की ओकर पिता राजा छथि?' हम उत्तर देलियनि: 'नहि'। हुनका पाछाँ चलनिहार उच्च पदक लोक छथि आकि नीच लोक?' हम उत्तर देलियनि: 'हुनकर पाछाँ चलनिहार सेहो नीच लोक छथि'। ओ फेर पुछलखिन: 'अनुयायी बढ़ि रहल अछि आकि घटि रहल अछि?' हम उत्तर देलियनि: 'बढ़ू'। ओ फेर पुछलखिन: 'की कियो अपन धर्म पर क्रोधित भेला के कारण धर्मत्याग केने अछि?' हम उत्तर देलियनि: 'किछु नहि'। ओ फेर पुछलखिन: 'ओ जे कहलक से कहबासँ पहिने कहियो ओकरा झूठ बाजल भेटल?' हम उत्तर देलियनि: 'कहियो नहि'। ओ फेर पुछलखिन: 'ओ कहियो ठकने अछि?' हम उत्तर देलियनि: ‘कहियो नहि। जखन हम सभ हुनका संग घुमैत रही तखन ओ कहियो एहन नहि केलनि'। अबू सुफियन कहलनि जे, हम एहि तरहक शब्दक अतिरिक्त किछु नहि द' सकैत छी'। ओ फेर पुछलखिन: 'अहाँ ओकरासँ लड़ि रहल छी?' हम उत्तर देलियनि: 'हँ'। ओ फेर पुछलखिन: 'युद्ध कोना समाप्त भेल?' हम उत्तर देलियनि: 'हमरा सभ आ हुनका बीचक युद्ध बहुत बेसी अछि।' कखनो ओ हमरा सभकेँ मारि दैत अछि, कखनो हम सभ ओकरा मारि दैत छी'। ओ फेर पुछलखिन: 'ओ अहाँकेँ की करबाक आदेश देलनि?' हम उत्तर देलियनि: 'ओ हमरा सभ केँ आदेश देलनि; 'अल्लाह के बिना कोनो साझीदारी केने अल्लाह के पूजा करू, आ अपन पूर्वज के कहल बात के त्याग करू।' ओ हमरा सभ केँ नमाज स्थापित करबाक, जकात देबाक, सच्चाई बजबाक, एक-दोसर केँ माफ करबाक आ रिश्तेदारी बनेबाक आज्ञा सेहो देलनि।' हेराक्लियस तखन अपन अनुवादक केँ कहलखिन, ‘कहू, हम अहाँ सँ ओहि आदमीक वंशक विषय मे पूछलहुँ, आ अहाँ हमरा कहलियैक जे ओ कुलीन वंशक अछि। अपन लोकक वंशज मे सेहो पलल-बढ़ल छलाह | हम पुछलियनि जे हुनकर कहल बात पहिने कियो कहने अछि, त' अहाँ कहलियनि जे नहि। जँ पहिने कियो कहितथि तँ हम हुनका एहन व्यक्तिक नकल करैत बुझितहुँ जे पहिने सेहो एहने बात कहने होथि । हम अहाँसँ इहो पुछलियनि जे हुनकर कोनो पिता राजवंशक छथि की नहि , आ अहाँ कहलियनि जे नहि । हम कहलियनि जँ हुनकर पिता राजवंशक रहितथि तऽ ओ अपन पिताक राज्यक मांग करैत रहैत । हमहूँ पुछलियैक जे ओ जे कहने छल से कहबासँ पहिने कहियो झूठ बाजल भेटल अछि कि नहि, आ अहाँ कहलौं जे नहि। हम बुझैत छी जे जँ ओ लोक सँ झूठ बाजबाक हिम्मत तक नहि केने छलाह, अल्लाह सँ दूर। आ हम अहाँ सभ सँ ईहो पुछने छी जे हुनकर पाछाँ चलयवला सभ कुलीन छथि आकि नीच लोकनि?' अहाँ हुनका पाछाँ-पाछाँ चलय बला नीच लोक सभ केँ उत्तर देलियैक। सचमुच, ओ सब नबी के अनुयायी छैथ। हम अहाँ स इहो पूछलौं जे फॉलोअर्स के संख्या बढ़ल या घटल, अहाँ जवाब देलौं जे बढ़ल। आ विश्वासक संग ता धरि से होइत छैक जाबत धरि ओ सिद्ध नहि भ' जाइत अछि। हम अहाँसँ इहो पुछने छी जे कियो अपन धर्मसँ क्रोधित भेलाक कारणे धर्मत्याग केने अछि ? अहाँ नहि उत्तर देलियैक। आ विश्वास तखन होइत छैक जखन हृदय मे बढ़ैत छैक आ बढ़ैत छैक। हमहूँ पुछलहुँ जे कहियो ठकने अछि की नहि, अहाँ जबाब देलहुँ कहियो नहि । आ एना भेल जे प्रेरित सभ ठक नहि क' सकलाह। आ हम अहाँ स इहो पूछने छी जे ओ अहाँ के की आदेश देलखिन, अहाँ जवाब देलौं जे ओ अहाँ के अल्लाह के कोनो संगत नै क के आराधना करय के आदेश देलखिन, आ मूर्ति के इबादत करय स मना क देलखिन, ओ अहाँ के नमाज के पालन करय के, जकात देबय के, सच बोलय के, एक दोसरा के माफ करय के आ दोस्ती कायम करय के आदेश सेहो देलखिन्ह. जँ अहाँक सभटा बात सत्य अछि तँ ओ हमरा पएरक नीचाँ राज्य पर अवश्य शासन करताह। सत्ते हमरा शंका भेल अछि जे आब ओ अहाँ सभक बीच नहि छथि, जँ हमरा हुनकासँ भेंट करबाक बाट बुझल रहैत तँ हम हुनकासँ भेंट करबाक प्रयास अवश्य करितहुँ जाबत धरि जखन हम हुनका बगलमे रहब तखन हुनकर पैर अवश्य धोतीह । तखन हेराक्लियस अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चिट्ठी मंगलक जे डिह्याह द्वारा बसरा के शासक के पास आनल गेल छल, त ओ हेराक्लियस के देलक, तखन ओ पढ़लक आ ओहि पर लिखल छल: 'बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम।' अल्लाह केरऽ सेवक आरू हुनकऽ रसूलुल्लाह मुहम्मद स॑ ल॑ क॑ हेराक्लियस तक । रोम के शासक, मार्गदर्शन के पालन करय वाला पर शांति हो। तखन ताहि सँ हम अहाँ केँ इस्लाम केर आह्वान सँ आमंत्रित करैत छी; इस्लाम अपनाउ अहाँ, तखन अहाँ सुरक्षित रहब, अल्लाह अहाँ के दोगुना इनाम देत। मुदा जँ अहाँ सभ मुँह घुमा लेब तँ अहाँ सभ अपन लोकक पाप सहब, आ: हे किताबक लोक, आऊ - पकड़ू - एकटा शब्द - फरमान - हमरा आ अहाँ सभक बीच कोनो अंतर नहि, जे हम सभ अल्लाहक अतिरिक्त ककरो पूजा नहि करब आ हम सभ हुनका संग किछु नहि जोड़ब आ हम सभ नहि - इहो - हमरा सभ मे सँ किछु गोटे अल्लाहक अतिरिक्त दोसर केँ प्रभु मानैत छी।' जँ ओ सभ मुँह घुमा लैत छथि तँ हुनका सभसँ कहू जे गवाही दिअ जे हम सभ अल्लाहक अधीन छी। अबू सुफियान कहलनि : 'हेराक्लियस अपन कहल बात पहुँचा देलाक बाद आ चिट्ठी पढ़ि क' समाप्त केलाक बाद हंगामा आ जोर-जोर सँ आवाज भेल, जाहि सँ ओ सभ हमरा सभ केँ बाहर भगा देलक।' हमरा सभकेँ भगा देल गेलाक बाद हम अपन मित्र सभसँ कहलियनि : 'सत्ते, हुनका अबू कब्स्याहक बेटाक अफेयरमे आमंत्रित कएल गेल छनि । हेराक्लियस रोमन साम्राज्यक चिन्ता मे छलाह।' ओहि समय हमरा इहो चिंता छल जे मुहम्मद विजयी हेताह, जाबत अंततः - ओ भाव ओकर बाद गायब भ गेल - अल्लाह हमरा इस्लाम अपनाबय लेल बाध्य क' देलनि. आ इलियाक कुलीन इब्न अन नझुर छलाह आ हेराक्लियस ईसाई बिशप छलाह, ओ कहलनि जे एक दिन जखन हेराक्लियस इलिया गेलाह' तखन ओ बहुत बेचैन छलाह, अपन किछु युद्ध सेनापति लोकनि सं कहलनि: 'सत्ते, हम अहाँक स्थिति सं इनकार करैत छी.' तखन इब्न नझुर कहलनि जे हेराक्लियस एकटा ज्योतिषी छलाह जे सदिखन तारा के यात्रा पर ध्यान दैत छलाह | एक बेर ओ पुरोहित लोकनिक प्रश्नक उत्तर देलनि जे हुनका सँ पूछलनि: 'एक राति जखन हम तारा सभक मार्ग देखैत रही तखन देखलहुँ जे खितान राजाक जन्म भेल अछि, एहि लोक मे के खतना भेल?' पुरोहित लोकनि केँ उत्तर दियौक; 'खतना करै वाला लोग यहूदी छै, यहूदी के कारण चिंता नै करऽ।' बस, अपन राज्यक सभ देशक आदेश दियौक, जाहि सँ ओहि देशक यहूदी सभ केँ मारल जाय'। ओहि समय बनी घसान के राजा के एकटा दूत हेराक्लियस के पेश केलनि जे ओ हुनका अल्लाह के रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बारे में बताबय, ओहि आदमी के कहानी सुनाबय के बाद हेराक्लियस के आदेश देलखिन जे हुनकर जांच कयल जाय जे हुनकर खतना भेल अछि कि नहिं. चेक केलाक बाद पता चलल जे ओ वास्तव मे कारी छल। तखन लोक हेराक्लियस केँ कहलक। हेराक्लियस ओहि आदमी सँ आन अरबक विषय मे पुछलकै, की खतना भेल छल वा नहि?' ओ उत्तर देलथिन; 'सब अरबक खतना भेल अछि'। हेराक्लियस कहलकै; 'ई उम्माक राजा छथि, सचमुच हुनकर जन्म भेलनि अछि' । तखन हेराक्लिसु रोम में एकटा मित्र के चिट्ठी पठेलनि जिनकर ज्ञान हेराक्लिसु के बराबर छलनि - जे हुनका पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्म के बारे में बताओल जाय - | एम्हर ओ हिमशा देशक यात्रा जारी रखलनि, मुदा हिमशा पहुँचबा सँ पहिने मित्रक पत्रक उत्तर पहिने आबि गेल छल | हुनकऽ दोस्त हेराक्लियस केरऽ ई विचार स॑ सहमत छेलै कि मुहम्मद केरऽ जन्म होय गेलऽ छै आरू वू सचमुच एगो पैगम्बर छै । तखन हेराक्लियस रोमन अधिकारी सब के हिमशा में अपन जगह पर आबय लेल आमंत्रित केलनि, सभा में सब गोटे के उपस्थिति के बाद हेराक्लियस सब दरवाजा पर ताला लगेबाक आदेश देलनि। तखन ओ कहलनि; 'हे रम राष्ट्र, की अहाँ सब गौरवशाली विजय आ प्रगति प्राप्त करब, जखन कि राज्य हमरा सभक हाथ मे अक्षुण्ण रहत? अगर चाहै छी त मुहम्मद के पैगम्बर के रूप में स्वीकार करू !'. ई बात सुनि ओ सभ जंगली गदहा जकाँ भागि गेल, भले सभ दरबज्जा पर ताला लागल हो। एहन स्थिति देखि हेराक्लियस के आशा खत्म भ गेलैन जे ओ सब मुहम्मद के पैगम्बरी पर विश्वास करत। तखन सभकेँ अपन-अपन स्थान पर घुरबाक आदेश देलनि आ कहलनि; 'असल मे हम एखन जे कहलहुँ से मात्र अहाँ सभक अडिगताक परीक्षण करबाक लेल छल ।' आब हम ओ संकल्प देखलहुँ अछि'। तखन ओ सभ हेराक्लियसक समक्ष प्रणाम कयलनि आ हुनका सँ प्रसन्न भेलाह | एहि तरहेँ हेराक्लियसक कथा समाप्त होइत अछि । एकरऽ बखान [सालिह बिन कैसन] आरू [यूनुस] आरू [मा'मार] न॑ [अज जुहरी] स॑ करल॑ छै ।
Imam Bukhari : 7
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى قَالَ أَخْبَرَنَا حَنْظَلَةُ بْنُ أَبِي سُفْيَانَ عَنْ عِكْرِمَةَ بْنِ خَالِدٍ عَنْ ابْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاقَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بُنِيَ الْإِسْلَامُ عَلَى خَمْسٍ شَهَادَةِ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ وَالْحَجِّ وَصَوْمِ رَمَضَانَ
हमरा सब के [अब्दुल्लाह बिन मूसा] कहलक अछि, हमरा सब के [हंझाला बिन अबू सुफियन] स ['इक्रीमा बिन खालिद] स [इब्न उमर] स कहलक अछि: रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'इस्लाम पांच -नींव- पर बनल अछि; गवाही जे अल्लाह के अलावा कोनो देवता नै छै आरू सचमुच मुहम्मद अल्लाह के रसूलुल्लाह छै, रमजान के दौरान नमाज स्थापित करै छै, जकात, हज करै छै आरू रोजा करै छै'।
Imam Bukhari : 8
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ الْجُعْفِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ الْعَقَدِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ بِلَالٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْإِيمَانُ بِضْعٌ وَسِتُّونَ شُعْبَةً وَالْحَيَاءُ شُعْبَةٌ مِنْ الْإِيمَانِ
हमरा सब [अब्दुल्लाह बिन मुहम्मद अल जूफी] के कहलक अछि, ओ हमरा सब के [अबू अमीर अल अकादी] के कहने अछि जे कहलनि, जे हमरा सब के [सुलेमान बिन बिलाल] के [अब्दुल्लाह बिन दिनार] स [अबू सालिह] स [अबू हुरैरा] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलक अछि, ओ कहलनि: 'ईमान के साठि स बेसी शाखा अछि, आ लाज विश्वासक अंग थिक'।
Imam Bukhari : 9
حَدَّثَنَا آدَمُ بْنُ أَبِي إِيَاسٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي السَّفَرِ وَإِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ الْمُسْلِمُ مَنْ سَلِمَ الْمُسْلِمُونَ مِنْ لِسَانِهِ وَيَدِهِ وَالْمُهَاجِرُ مَنْ هَجَرَ مَا نَهَى اللَّهُ عَنْهُقَالَ أَبُو عَبْد اللَّهِ وَقَالَ أَبُو مُعَاوِيَةَ حَدَّثَنَا دَاوُدُ هُوَ ابْنُ أَبِي هِنْدٍ عَنْ عَامِرٍ قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ يَعْنِي ابْنَ عَمْرٍو عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ عَبْدُ الْأَعْلَى عَنْ دَاوُدَ عَنْ عَامِرٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमरा सब स रिवायत अछि [आदम बिन अबू इयास] स कहल गेल अछि, हमरा सब स [स्यूबाह] स [अब्दुल्लाह बिन अबू अस सफर] स आ [इस्माइल बिन अबू खालिद] स [असी स्याबी] स [अब्दुल्लाह बिन अमरू] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि स अल्लाम स कहल गेल अछि, कहल गेल अछि: मुसलमान एकटा एहन व्यक्ति अछि जेकर वचन आ हाथ मुसलमान के लेलऽ सुरक्षित छै, आरू मुहाजिर वू व्यक्ति छै जे अल्लाह केरऽ मना करलऽ चीज के त्याग करी दै छै । ' अबू अब्दुल्ला कहलनि; आ [अबू मुअविय्याह] कहलनि; हमरा सभ केँ [दाउद] कहि देने छथि, ओ इब्न हिन्दक बेटा छथि, ['अमीर] के कहलनि; हम [अब्दुल्लाह] के मतलब इब्न अमरू के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स सुनलहुं आ [अब्दुल अ'ला] के [दाउद] स [अमीर] स [अब्दुल्लाह] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहलौं
Imam Bukhari : 10
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الْقُرَشِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو بُرْدَةَ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَى رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَيُّ الْإِسْلَامِ أَفْضَلُ قَالَ مَنْ سَلِمَ الْمُسْلِمُونَ مِنْ لِسَانِهِ وَيَدِهِ
हमरा सब के [सैद बिन याह्या बिन सईद अल कुरसी] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [हमर पिता] कहलनि, जे हमरा सब के [अबू बुरदाह बिन अब्दुल्लाह बिन अबू बुरदाह] [अबू बुर्दाह] स [अबू मूसा] स कहलक अछि: 'हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, कोन इस्लाम सबस महत्वपूर्ण अछि?' रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'मुसलमान के मुँह आ हाथ स सुरक्षित अछि'।
Imam Bukhari : 11
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ خَالِدٍ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ يَزِيدَ عَنْ أَبِي الْخَيْرِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاأَنَّ رَجُلًا سَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَيُّ الْإِسْلَامِ خَيْرٌ قَالَ تُطْعِمُ الطَّعَامَ وَتَقْرَأُ السَّلَامَ عَلَى مَنْ عَرَفْتَ وَمَنْ لَمْ تَعْرِفْ
हमरा सब के कहलक अछि [अमरू बिन खालिद] कहलक अछि, हमरा सब के [अल लैट्स] के [यजीद] स [अबू अल खैर] स [अब्दुल्लाह बिन अमरू] स कहलक अछि; कियो छल जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स पूछलक; 'कोन इस्लाम सबसँ नीक अछि ?' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब देलखिन: 'अहाँ भोजन दैत छी, अपन जान-पहचान वाला लोक के नमस्कार करू आ जिनका अहाँ नहि चिन्हैत छी'।
Imam Bukhari : 12
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ شُعْبَةَ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَعَنْ حُسَيْنٍ الْمُعَلِّمِ قَالَ حَدَّثَنَا قَتَادَةُ عَنْ أَنَسٍعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى يُحِبَّ لِأَخِيهِ مَا يُحِبُّ لِنَفْسِهِ
हमरा सब स [मुसद्दद] कहलक अछि, हमरा सब स [याह्या] स [स्यूबाह] स [कोतादह] स [अनास] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स रिवायत केने अछि आ [हुसैन अल मुअलिम] स कहलक अछि, हमरा सब स [कतादाह] स [अनास] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स रिवायत केने अछि, ओ कहलक: ‘अहाँ सब मे स कियो नहि विश्वास करैत अछि जाबत धरि ओ अपन भाइ सँ ओहिना प्रेम नहि करैत अछि जेना अपना सँ प्रेम करैत अछि'।
Imam Bukhari : 13
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَوَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ وَالِدِهِ وَوَلَدِهِ
हमरा सब के [अबू अल यमन] कहलक, हमरा सब के रिपोर्ट कयल गेल अछि [स्यूआइब] कहलनि, हमरा सब के [अबू अज़ ज़नाद] के [अल अ'राज] स [अबू हुरैरा] स कहल गेल अछि, जे अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहलनि: 'त' ओहि व्यक्ति के द्वारा जिनकर हाथ में हमर आत्मा अछि, अहाँ सब में स कियो विश्वास नहि करत जाबत धरि हमरा स बेसी प्रेम नहि भ जायत।' ओकर माता-पिता आ ओकर बच्चा सभ'।
Imam Bukhari : 14
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ عَنْ أَنَسٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ح و حَدَّثَنَا آدَمُ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسٍ قَالَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يُؤْمِنُ أَحَدُكُمْ حَتَّى أَكُونَ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ وَالِدِهِ وَوَلَدِهِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
ई हमरा सब स॑ [या'कुब बिन इब्राहिम] न॑ कहलकै, ई हमरा [इब्न उलायह] स॑ [अब्दुल अजीज बिन शुहैब] स॑ [अनस] स॑ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स॑ संबंधित करलऽ गेलऽ छै आरू ई हमरा स॑ भी संबंधित करलऽ गेलऽ छै [आदम] न॑ कहलकै, ई हमरा [स्यूबाह] स॑ [कतदाह] स॑ [अनास] स॑ संबंधित छै, द नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि: 'अहाँ मे सँ कियो विश्वास नहि करत जाबत धरि हम नहि करब ओ अपन माता-पिता, अपन बच्चा आ समस्त मनुक्ख सँ बेसी प्रेम करैत अछि।'
Imam Bukhari : 15
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ أَبِي قِلَابَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ ثَلَاثٌ مَنْ كُنَّ فِيهِ وَجَدَ حَلَاوَةَ الْإِيمَانِ أَنْ يَكُونَ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِمَّا سِوَاهُمَا وَأَنْ يُحِبَّ الْمَرْءَ لَا يُحِبُّهُ إِلَّا لِلَّهِ وَأَنْ يَكْرَهَ أَنْ يَعُودَ فِي الْكُفْرِ كَمَا يَكْرَهُ أَنْ يُقْذَفَ فِي النَّارِ
हमरा सब के कहल गेल अछि [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] कहलनि, हमरा सब के कहल गेल अछि [अब्दुल वहाब अतस त्साफी] कहलनि, हमरा सब के [अय्यूब] के [अबू किलाबाह] स [अनस बिन मलिक] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहल गेल अछि, ओ कहलनि: तीन बात जे अगर कोनो व्यक्ति के पास अछि त ओकरा इमान के मिठास प्राप्त होयत: ओ अल्लाह के बनौलनि आ हुनकर रसूलुल्लाह एहि दुनूक अतिरिक्त हुनका सँ बेसी प्रिय छलाह | जँ ककरोसँ प्रेम करैए तँ अल्लाहक लेल छोड़ि ओकरासँ प्रेम नै करैए। आ ओकरा अविश्वास मे घुरबा सँ ओतबे घृणा होइत छैक जतेक नरक मे फेकल जेबा सँ।'
Imam Bukhari : 16
حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ جَبْرٍ قَالَ سَمِعْتُ أَنَسًاعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ آيَةُ الْإِيمَانِ حُبُّ الْأَنْصَارِ وَآيَةُ النِّفَاقِ بُغْضُ الْأَنْصَارِ
हमरा सब के कहलक अछि [अबू अल वलीद] कहलक अछि, हमरा सब के कहलक अछि [स्यूबाह] हमरा [अब्दुल्लाह बिन अब्दुल्लाह बिन जबर] कहलक अछि, कहलक; हम नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स [अनस] सुनलहुं, ओ कहलनि: 'ईमान के निशानी अछि -अंसार स प्रेम करब आ निफाक के निशानी अछि -अंसार स नफरत करब'।
Imam Bukhari : 17
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو إِدْرِيسَ عَائِذُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَنَّ عُبَادَةَ بْنَ الصَّامِتِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُوَكَانَ شَهِدَ بَدْرًا وَهُوَ أَحَدُ النُّقَبَاءِ لَيْلَةَ الْعَقَبَةِ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ وَحَوْلَهُ عِصَابَةٌ مِنْ أَصْحَابِهِ بَايِعُونِي عَلَى أَنْ لَا تُشْرِكُوا بِاللَّهِ شَيْئًا وَلَا تَسْرِقُوا وَلَا تَزْنُوا وَلَا تَقْتُلُوا أَوْلَادَكُمْ وَلَا تَأْتُوا بِبُهْتَانٍ تَفْتَرُونَهُ بَيْنَ أَيْدِيكُمْ وَأَرْجُلِكُمْ وَلَا تَعْصُوا فِي مَعْرُوفٍ فَمَنْ وَفَى مِنْكُمْ فَأَجْرُهُ عَلَى اللَّهِ وَمَنْ أَصَابَ مِنْ ذَلِكَ شَيْئًا فَعُوقِبَ فِي الدُّنْيَا فَهُوَ كَفَّارَةٌ لَهُ وَمَنْ أَصَابَ مِنْ ذَلِكَ شَيْئًا ثُمَّ سَتَرَهُ اللَّهُ فَهُوَ إِلَى اللَّهِ إِنْ شَاءَ عَفَا عَنْهُ وَإِنْ شَاءَ عَاقَبَهُ فَبَايَعْنَاهُ عَلَى ذَلِك
हमरा सब के कहलक अछि [अबू अल यमन] कहलक अछि, हमरा सब के [स्यूअइब] स कहलक अछि [अज जुहरी] कहलक अछि, हमरा सब के [अबू इदरीश आइजुल्लाह बिन अब्दुल्लाह] के कहलक अछि, जे [उबादा बिन अश शमित] एकटा मित्र छलाह जे बदर के लड़ाई में भाग लेलनि आ ओहो ओहि में स एक छलाह जे अकोबा के राति में शपथ लेने छलाह, ओ कहलनि; कि अल्लाह केरऽ रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम न॑ जब॑ अपनऽ कुछ दोस्तऽ के बीच छेलै त॑ कहलकै कि हमरा स॑ वफादारी प॑ विश्वास करऽ कि अल्लाह के साथ साथी क॑ कोनो भी चीज के साथ नै जोड़ना, चोरी नै करना, व्यभिचार नै करना, अपनऽ बच्चा सिनी क॑ नै मारना, झूठ नै गढ़ना जे आपने हाथ-पैर के बीच आविष्कार करै छियै, कोनो भी चीज के आज्ञा नै मानना जे सही छै । अहाँ सभ मे सँ जे कियो ओकरा सभ केँ पूरा करत, ओकर इनाम अल्लाह केर लग छैक, आ जे कियो एहि सब बातक उल्लंघन करत आ तखन अल्लाह ओकरा एहि दुनिया मे सजा दैत छैक, ओकरा लेल ई कफरत छैक, आ जे कियो एहि सब बातक उल्लंघन करत आ फेर अल्लाह ओकरा झाँपि दैत छैक - ओकरा एहि दुनिया मे सजा नहि दैत छैक - तखन ओकर कारोबार अल्लाह लग वापस आबि जाइत छैक, जँ ओ चाहैत अछि त’ ओकरा माफ क’ देतैक वा ओकरा सजा देत’। तेँ हम सभ एहि सभ बातक लेल हुनका प्रति निष्ठा के प्रण केलहुँ ।
Imam Bukhari : 18
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّهُ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُوشِكُ أَنْ يَكُونَ خَيْرَ مَالِ الْمُسْلِمِ غَنَمٌ يَتْبَعُ بِهَا شَعَفَ الْجِبَالِ وَمَوَاقِعَ الْقَطْرِ يَفِرُّ بِدِينِهِ مِنْ الْفِتَنِ
हमरा सब के [अब्दुल्लाह बिन मसलमाह] द्वारा [मलिक] स [अब्दुर्रहमान बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुररहमान बिन अबू शाआशाह] स [अपन पिता] स [अबू सईद अल खुदरी] स कहल गेल अछि जे ओ कहलनि, रसुलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसलम कहलनि: 'ई लगभग भेल छल - कहियो - जे मुसलमान के सबस नीक खजाना छल बकरी ओ पहाड़क चोटी आ दूर-दूर धरि चरैत छल, ओकरा ल' क' चलि गेल। ओकर धर्म निंदा के डर के कारण छै'।
Imam Bukhari : 19
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَامٍ قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدَةُ عَنْ هِشَامٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا أَمَرَهُمْ أَمَرَهُمْ مِنْ الْأَعْمَالِ بِمَا يُطِيقُونَ قَالُوا إِنَّا لَسْنَا كَهَيْئَتِكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ اللَّهَ قَدْ غَفَرَ لَكَ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِكَ وَمَا تَأَخَّرَ فَيَغْضَبُ حَتَّى يُعْرَفَ الْغَضَبُ فِي وَجْهِهِ ثُمَّ يَقُولُ إِنَّ أَتْقَاكُمْ وَأَعْلَمَكُمْ بِاللَّهِ أَنَا
हमरा सब के कहलक अछि [मुहम्मद बिन सलाम] कहलक अछि, हमरा सब के [अब्दाह] के [हिसियाम] स [अपन पिता] स [आइशा] स कहलक अछि: 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जखन ओ सहाबा सब के आदेश देलखिन त ओ हुनका सब के एहन काज करय के आदेश देलखिन जे ओ सब करय में सक्षम छलाह, तखन साथी सब कहलखिन; 'हम अहाँक समान नहि छी, हे अल्लाह केर रसूलुल्लाह, कारण अहाँ केँ अहाँक बीतल आ भविष्यक पाप माफ भ' गेल अछि'। त ओ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क्रोधित भ गेलाह जे हुनकर चेहरा स देखल जा सकैत छल, फेर कहलखिन: 'सत्ते, जे सबसँ बेसी धर्मात्मा अछि आ अहाँ सब मे अल्लाह के सबस बेसी बुझैत अछि, ओ हम छी'।
Imam Bukhari : 20
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ ثَلَاثٌ مَنْ كُنَّ فِيهِ وَجَدَ حَلَاوَةَ الْإِيمَانِ مَنْ كَانَ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِمَّا سِوَاهُمَا وَمَنْ أَحَبَّ عَبْدًا لَا يُحِبُّهُ إِلَّا لِلَّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَمَنْ يَكْرَهُ أَنْ يَعُودَ فِي الْكُفْرِ بَعْدَ إِذْ أَنْقَذَهُ اللَّهُ مِنْهُ كَمَا يَكْرَهُ أَنْ يُلْقَى فِي النَّارِ
हमरा सब के [सुलेमान बिन हर्ब] कहलक अछि, हमरा सब के [स्यूबाह] के [कोतादह] स [अनस बिन मालिक] स नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स कहल गेल अछि, ओ कहलनि: 'तीन -चीज- जे अगर कोनो व्यक्ति के पास अछि त ओकरा ईमान के मिठास प्राप्त होयत: अल्लाह आ हुनकर रसूलुल्लाह हुनका लेल एहि दुनू के अलावा बेसी प्रिय छथि। आरू जे अगर ककरो स॑ प्रेम करै छै त॑ अल्लाह अज्जा वजल्ला के अलावा वू व्यक्ति स॑ प्रेम नै करै छै । आ जे अविश्वास मे घुरबा सँ ओतबे घृणा करैत अछि जतेक नरक मे फेकल जेबा सँ घृणा करैत अछि'।