Nabi SAW membatalkan puasanya di Arafah ketika haji agar umat tahu itu tidak diwajibkan
Imam Tirmidzi : 681
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَفْطَرَ بِعَرَفَةَ وَأَرْسَلَتْ إِلَيْهِ أُمُّ الْفَضْلِ بِلَبَنٍ فَشَرِبَوَفِي الْبَاب عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَابْنِ عُمَرَ وَأُمِّ الْفَضْلِ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَ حَجَجْتُ مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمْ يَصُمْهُ يَعْنِي يَوْمَ عَرَفَةَ وَمَعَ أَبِي بَكْرٍ فَلَمْ يَصُمْهُ وَمَعَ عُمَرَ فَلَمْ يَصُمْهُ وَمَعَ عُثْمَانَ فَلَمْ يَصُمْهُ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ يَسْتَحِبُّونَ الْإِفْطَارَ بِعَرَفَةَ لِيَتَقَوَّى بِهِ الرَّجُلُ عَلَى الدُّعَاءِ وَقَدْ صَامَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ يَوْمَ عَرَفَةَ بِعَرَفَةَ
हमसे कहिस है [अहमद बिन मणि] हमसे कहिस है [इस्माइल बिन उलैया] हमसे [अय्यूब] से [इकरीमा] से [इब्न अब्बास] से कहिस है कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि व सलाम ने अराफा मा रोजा तोड़िन अऊर उम्मुल फदल्ल ने ओनके पास दूध भेजा, फिर उ ओका पी लिहिन। यहि अध्याय मा - अबू हुरैरा, इब्न उमर अऊर उम्मुल फदल से एक - पेंट - इतिहास भी है। अबू ईसा ने कहा, इब्न अब्बास का हदीस एक हसन प्रामाणिक हदीस है। इब्न उमर से रिवायत है कि उ कहिन, हम पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथे हज किहे हई जबकि उ अरफात मा रोजा नाहीं रखे रहेन, हम अबू बकर के साथे भी हज रखे हई अऊर उ भी अरफात मा रोजा नाहीं रखे रहेन, एक बार उमर के साथे अऊर उ रोजा नाहीं रखे रहे, वइसने उहमान के साथे भी रोजा नाहीं रखे रहे - अधिकांश उलमा द्वारा भी पालन कीन जात है, उ लोग अरफात मा रोजा न रखै का सुन्नत बनावत हैं ताकि नमाज पढ़ै के लिए पर्याप्त मजबूत हो। अऊर कुछ उलेमा भी अराफा मा रोजा रखत हैं जब उ अराफा मा होत हैं।