Imam Tirmidzi : 629
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي حَرْمَلَةَ أَخْبَرَنِي كُرَيْبٌأَنَّ أُمَّ الْفَضْلِ بِنْتَ الْحَارِثِ بَعَثَتْهُ إِلَى مُعَاوِيَةَ بِالشَّامِ قَالَ فَقَدِمْتُ الشَّامَ فَقَضَيْتُ حَاجَتَهَا وَاسْتُهِلَّ عَلَيَّ هِلَالُ رَمَضَانَ وَأَنَا بِالشَّامِ فَرَأَيْنَا الْهِلَالَ لَيْلَةَ الْجُمُعَةِ ثُمَّ قَدِمْتُ الْمَدِينَةَ فِي آخِرِ الشَّهْرِ فَسَأَلَنِي ابْنُ عَبَّاسٍ ثُمَّ ذَكَرَ الْهِلَالَ فَقَالَ مَتَى رَأَيْتُمْ الْهِلَالَ فَقُلْتُ رَأَيْنَاهُ لَيْلَةَ الْجُمُعَةِ فَقَالَ أَأَنْتَ رَأَيْتَهُ لَيْلَةَ الْجُمُعَةِ فَقُلْتُ رَآهُ النَّاسُ وَصَامُوا وَصَامَ مُعَاوِيَةُ قَالَ لَكِنْ رَأَيْنَاهُ لَيْلَةَ السَّبْتِ فَلَا نَزَالُ نَصُومُ حَتَّى نُكْمِلَ ثَلَاثِينَ يَوْمًا أَوْ نَرَاهُ فَقُلْتُ أَلَا تَكْتَفِي بِرُؤْيَةِ مُعَاوِيَةَ وَصِيَامِهِ قَالَ لَا هَكَذَا أَمَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَقَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا الْحَدِيثِ عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنَّ لِكُلِّ أَهْلِ بَلَدٍ رُؤْيَتَهُمْ
हमसे कहिन है [अली बिन हुजर] हमसे कहिन है [इस्माइल बिन जाफर] हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अबू हरमाला] हमसे कहिन है [कुरैब] कि उम्मुल फदल ने ओनका एक उद्देश्य से स्याम मा मुआविया से मिले खातिर भेजा है, उ कहिन, जब हम स्याम पहुँचेन अऊर जरूरतन के साथ खतम किहिन, त अचानक हम महीना के चंद्रमा देखेन रमदलन, जब हम स्याम मा रहेन। हमने शुक्रवार रात को देखा फिर मैं रमदलान के महीने के अंत में मदीना लौटा फिर [इब्नू अब्बास] ने अमावस्या के बारे में बताया, आप अमावस्या कब देखते हैं? हम जवाब दिहेन, हम शुक्रवार के रात देखेन, उ कहिन, का तुम शुक्रवार के रात देखेन?, हम जवाब दिहेन, सब देखिन, फिर उइ उपवास किहिन, वइसने मुआविया भी किहिन। इब्नू अब्बास ने फिर कहा, लेकिन हमने शनिवार रात को देखा और तब तक रोजा रखेंगे जब तक गिनती तीस दिन न हो जाए या हम अमावस्या देख लेंगे, हमने पूछा, का आप मुआविया के रूअया और रोजा का पालन नहीं करत हैं, उन्होंने जवाब दिया, नहीं, लेकिन यही रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने हमसे आदेश दिया है। अबू ईसा ने कहा, इब्न अब्बास के हदीस एक हसन शाहीह गरीब हदीस है अऊर विद्वानन द्वारा एक कानूनी निष्कर्ष के साथ अभ्यास कीन जात है कि हर क्षेत्र अपने रुअत के आधार पर रोजा शुरू करत है।