Mati tidak syirik pasti kesurga walau berzina dan mencuri
Imam Tirmidzi : 627
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَعِيلَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ أَبِي ثَوْرٍ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَجَاءَ أَعْرَابِيٌّ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ إِنِّي رَأَيْتُ الْهِلَالَ قَالَ أَتَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ أَتَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ قَالَ نَعَمْ قَالَ يَا بِلَالُ أَذِّنْ فِي النَّاسِ أَنْ يَصُومُوا غَدًاحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْجُعْفِيُّ عَنْ زَائِدَةَ عَنْ سِمَاكٍ نَحْوَهُ بِهَذَا الْإِسْنَادِ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ فِيهِ اخْتِلَافٌ وَرَوَى سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَغَيْرُهُ عَنْ سِمَاكٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُرْسَلًا وَأَكْثَرُ أَصْحَابِ سِمَاكٍ رَوَوْا عَنْ سِمَاكٍ عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُرْسَلًا وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا الْحَدِيثِ عِنْدَ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ قَالُوا تُقْبَلُ شَهَادَةُ رَجُلٍ وَاحِدٍ فِي الصِّيَامِ وَبِهِ يَقُولُ ابْنُ الْمُبَارَكِ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَأَهْلُ الْكُوفَةِ قَالَ إِسْحَقُ لَا يُصَامُ إِلَّا بِشَهَادَةِ رَجُلَيْنِ وَلَمْ يَخْتَلِفْ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي الْإِفْطَارِ أَنَّهُ لَا يُقْبَلُ فِيهِ إِلَّا شَهَادَةُ رَجُلَيْنِ
हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन इस्माइल] हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन अश शबाह] हमसे कहिस है [अल वालिद बिन अबू त्सौर] से [सिमक] से ['इकरीमा] से [इब्न अब्बास] उ कहिन, एक बेडौइन पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आवा, कहिस, इमायल ने नया मोलन - पूछा: 'का तुम गवाही देत हौ कि अल्लाह के अलावा कौनो भगवान नाहीं है अऊर मुहम्मद अल्लाह के रसूल हैं?' उन्होंने जवाब दिया, हाँ, पैगम्बर बिलाल से कहिन: 'हे बिलाल, घोषणा करौ कि लोग कल से रोजा रखै लागिहैं'। हमसे कहिन है [अबू कुरैब] हमसे [हुसैन अल जुफी] से [जैदा] से [सिमक] से कहिन है जइसे कि ऊपर के हदीस मा उहै सनाद के साथ है। अबू ईसा ने कहा, इब्न अब्बास के हदीस मा एक विवाद है, [सुफियान अत्स त्सौरी] अऊर दूसरन ने पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से [सिमक] से [इकरीमा] से ई हदीस का मुर्सल तरीका से सुनाइन। सिमक के अधिकांश साथियन ने पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इकरीमा से सिमक से मुर्सल तरीका से सुनाइन अऊर ई हदीस का अधिकांश विद्वानन द्वारा अपनावा गा रहा, उ कहिन, ई रोजा के शुरुआत मा एक आदमी के गवाही का स्वीकार करब इब्न अल मुबारक, शफीद अऊर कुफा के निवासियन के राय भी रहा। इशाक कहिन, "व्रत शुरू करै के लिए एक मनई के गवाही स्वीकार नाहीं कीन जात है लेकिन दुई मनई का स्वीकार करै का चाही।" उलमा रमदलान के अंत के बारे मा असहमत नाहीं हैं, कि ई स्वीकार नाहीं कीन जात है - रुयह हिलाल के गवाही - जब तक कि ई दुइ मनई द्वारा गवाह न होइ।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 3371, 3442, 3833, 3838, 4011, 4174, 4193, 4423, 6297, 8382, 10376, 11327, 11936, 12145, 12326, 13071, 13417, 13964, 14184, 14485, 14667, 14675, 16700, 16741, 17568, 18142, 18264, 20385, 20446, 20462, 20491, 20493, 20987, 20989, 20990, 20993, 20994, 20996, 20997, 20999, 21002, 21019, 21029, 21030, 21058, 21069, 21077, 21082, 21427, 21620, 21653, 22423, 22458, 22489, 26251, 26267
Imam Bukhari : 125, 126, 1161, 1162, 2213, 2644, 2983, 3180, 4137, 5379, 5510, 5796, 5797, 5962, 5963, 6019, 6189, 6825, 6874, 6933
Imam Muslim : 38, 41, 42, 43, 44, 45, 46, 47, 48, 134, 135, 136, 137, 138, 1654, 1655
Imam Tirmidzi : 627, 2562, 2567, 2568
Imam Nasa'i : 2085, 2086, 3081, 3944
Imam Ibnu Majah : 1642, 2608, 3786