Imam Tirmidzi : 368
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ عَنْ أَبِي مَالِكٍ الْأَشْجَعِيِّ قَالَ قُلْتُ لِأَبِييَا أَبَةِ إِنَّكَ قَدْ صَلَّيْتَ خَلْفَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ وَعُثْمَانَ وَعَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ هَا هُنَا بِالْكُوفَةِ نَحْوًا مِنْ خَمْسِ سِنِينَ أَكَانُوا يَقْنُتُونَ قَالَ أَيْ بُنَيَّ مُحْدَثٌقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَمَلُ عَلَيْهِ عِنْدَ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ و قَالَ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ إِنْ قَنَتَ فِي الْفَجْرِ فَحَسَنٌ وَإِنْ لَمْ يَقْنُتْ فَحَسَنٌ وَاخْتَارَ أَنْ لَا يَقْنُتَ وَلَمْ يَرَ ابْنُ الْمُبَارَكِ الْقُنُوتَ فِي الْفَجْرِ قَالَ أَبُو عِيسَى وَأَبُو مَالِكٍ الْأَشْجَعِيُّ اسْمُهُ سَعْدُ بْنُ طَارِقِ بْنِ أَشْيَمَ حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ أَبِي مَالِكٍ الْأَشْجَعِيِّ بِهَذَا الْإِسْنَادِ نَحْوَهُ بِمَعْنَاهُ
हमसे कहिन है [अहमद बिन मणि'] कहिन; हमका [यजीद बिन हारून] [अबू किलाबाह अल अस्यजाई] से बताइस है, उ कहिन; 'मैंने एक बार [अपने पिताजी] से पूछा, 'हे पिताजी, वास्तव में आपने कूफा में लगभग पांच साल तक रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, अबू बकर, उमर, उस्मान अऊर अली के पीछे नमाज पढ़ी है, तो का उ लोग कुनुत पढ़िन?' ऊ जवाब दिहिस, 'हे मोर बेटवा, ई तौ नयी बात है'। अबू ईसा कहिन; 'ई हदीस हसन प्रामाणिक है। अऊर ई हदीस का बहुत से विद्वानन द्वारा अमल कीन जात है। सुफयान आट्स त्सौरी ने कहा; 'अगर कोई सुबह के नमाज मा क्नुत करै तौ अच्छा है, अगर नाहीं तौ अच्छा भी है'। अऊर सुफयान आट्स त्सौरी ने क्नुट न करै का विकल्प चुना। वइसने, इब्न अल मुबारक ने सुबह के नमाज मा कुनुत नाहीं किहिन। अबू ईसा कहिन; अबू मलिक अल अस्यजाई का नाम सद बिन तारिक बिन अस्याम है। हमका बतावा गा है [सालिह बिन अब्दुल्ला] कहिन; हमका [अबू अवाना] [अबू मलिक अल अस्यजाई] से ई सनाद के साथे ई हदीस का अर्थ बताइस है'।