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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Tirmidzi : 367

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى قَالَا حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي لَيْلَى عَنْ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَقْنُتُ فِي صَلَاةِ الصُّبْحِ وَالْمَغْرِبِقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عَلِيٍّ وَأَنَسٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَخُفَافِ بْنِ أَيْمَاءَ بْنِ رَحْضَةَ الْغِفَارِيِّ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ الْبَرَاءِ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَاخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي الْقُنُوتِ فِي صَلَاةِ الْفَجْرِ فَرَأَى بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَغَيْرِهِمْ الْقُنُوتَ فِي صَلَاةِ الْفَجْرِ وَهُوَ قَوْلُ مَالِكٍ وَالشَّافِعِيِّ و قَالَ أَحْمَدُ وَإِسْحَقُ لَا يُقْنَتُ فِي الْفَجْرِ إِلَّا عِنْدَ نَازِلَةٍ تَنْزِلُ بِالْمُسْلِمِينَ فَإِذَا نَزَلَتْ نَازِلَةٌ فَلِلْإِمَامِ أَنْ يَدْعُوَ لِجُيُوشِ الْمُسْلِمِينَ

हमका बतावा गा है कि [कुतैबा] अऊर [मुहम्मद बिन अल मुत्सना] दुइनौ कहिन; हमका [घुंदर मुहम्मद बिन जाफर] से [स्यु'बाह] से [अमरू बिन मुर्रा] से [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से [अल बारा` बिन अजीब] से कहिन है; 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सुबह अऊर शाम के नमाज के दौरान कुनुत पढ़ा'। उ कहिन; 'इ अध्याय मा अली, अनस, अबू हुरैरा, इब्न अब्बास अऊर खफफ बिन ऐमा बिन रहदलाह अल घिफारी से भी रिवायत हैं'। अबू ईसा कहिन; 'अल बारा हदीस' हसन प्रामाणिक है। विद्वानन मा सुबह के नमाज मा क्यूनुत के बारे मा असहमत हैं, पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियन मा से कुछ विद्वान अऊर कुछ विद्वान सुबह के नमाज मा क्यूनुत के अनुमति देत हैं। ई राय इमाम मलिक अऊर स्याफी ने लीन रहा। जबकि इमाम अहमद और इशाक ने कहा; 'सुबह के नमाज मा क्नुत करब जायज नाहीं है, सिवाय तब के जब मुसलमानन का खतरा होय।' अगर मुसलमानन पर कौनो आपदा आवत है, तौ इमाम का मुसलमान सेना के लिए दुआ करै का चाही।