Berinfaklah dan janganlah kamu menahan pemberian, nanti Allah akan menahan pemberian-Nya kepadamu
Imam Abu Dawud : 1448
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ أَخْبَرَنَا أَيُّوبُ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي مُلَيْكَةَ حَدَّثَتْنِي أَسْمَاءُ بِنْتُ أَبِي بَكْرٍ قَالَتْقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا لِي شَيْءٌ إِلَّا مَا أَدْخَلَ عَلَيَّ الزُّبَيْرُ بَيْتَهُ أَفَأُعْطِي مِنْهُ قَالَ أَعْطِي وَلَا تُوكِي فَيُوكَى عَلَيْكِ
उ हमसे [मुसद्दाद] कहिन, उ हमसे [इस्माइल] कहिन, उ हमसे [अय्यूब] कहिन, उ हमसे [अब्दुल्लाह बिन अबूमुलैका] कहिन, उ हमसे [असमा बिन्त अबू बकर] कहिन, उ कहिन; हे अल्लाह के रसूल मेरे पास कुछ नहीं है सिवाय जो जुबैर ने अपने घर में रखा है, क्या मैं दे सकता हूँ? उ जवाब दिहिन: 'दौ अऊर दान न रोकौ, तब तोहरे साथै भी वइसने व्यवहार कीन जाई'।