Janganlah kamu perhitungan dalam infaq karena nanti Allah akan berhitung kepadamu
Imam Ahmad : 25751
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ عَنْ فَاطِمَةَ بِنْتِ الْمُنْذِرِ عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍ وَكَانَتْ مُحْصِيَةً وَعَنِ عَبَّادِ بْنِ حَمْزَةَ عَنْ أَسْمَاءَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَهَا أَنْفِقِي أَوْ انْضَخِي أَوْ انْفَحِي هَكَذَا وَهَكَذَا وَلَا تُوعِي فَيُوعِيَ اللَّهُ عَلَيْكِ وَلَا تُحْصِي فَيُحْصِي اللَّهُ عَلَيْكِ
हमसे [मुहम्मद बिन बिसिर] उ कहिन, उ हमसे [हिस्याम बिन उर्वाह] से [फातिमा बिन मुंदज़िर] से [असमा' बिन अबू बकर] से कहिन अऊर उ अभी-अभी कुछ गणना किहिन रहैं, अऊर ['अब्बाद बिन हमजा] से [असमा'] कि रसूलल्लाह सल्लाह अलैह वल्लाह वल्लम से कहिन: या दान दें। कुछ थोड़े या बहुत से दान करौ, जइसे अऊर ई तरह, अऊर आपन कुछ धन का वापस न रखौ - दान न करै चाहत हौ -, नाहीं तौ अल्लाह आपके रिजकी का संकुचित कइ देई। और नटखट मत बनो नहीं तो अल्लाह आपके प्रति नटखट हो जाय'।