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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Allah Asma’ul husnaa Ar Rahim

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Ar Rahim
Imam Bukhari : 115

حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَإِنَّ النَّاسَ يَقُولُونَ أَكْثَرَ أَبُو هُرَيْرَةَ وَلَوْلَا آيَتَانِ فِي كِتَابِ اللَّهِ مَا حَدَّثْتُ حَدِيثًا ثُمَّ يَتْلُو{ إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنْزَلْنَا مِنْ الْبَيِّنَاتِ وَالْهُدَى إِلَى قَوْلِهِ الرَّحِيمُ }إِنَّ إِخْوَانَنَا مِنْ الْمُهَاجِرِينَ كَانَ يَشْغَلُهُمْ الصَّفْقُ بِالْأَسْوَاقِ وَإِنَّ إِخْوَانَنَا مِنْ الْأَنْصَارِ كَانَ يَشْغَلُهُمْ الْعَمَلُ فِي أَمْوَالِهِمْ وَإِنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ كَانَ يَلْزَمُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِشِبَعِ بَطْنِهِ وَيَحْضُرُ مَا لَا يَحْضُرُونَ وَيَحْفَظُ مَا لَا يَحْفَظُونَ

हमनी के बतावल गइल बा [अब्दुल अजीज बिन अब्दुल्लाह] कहले बाड़न, हमरा [मलिक] के [इब्न शिहाब] से [अल अ’राज] से [अबू हुरैरा] से बतावल गइल बा, ‘वास्तव में लोग कहत बा कि ‘अबू हुरैरा उहे हवे जे रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम- से हदीस के सबसे अधिका -संचरण कइले बाड़न, अगर दू गो खातिर ना रहित अल्लाह के किताब में आयत हम एकरा के ना पहुंचवले रहतीं'। तब उ आयत पढ़ले: '-वास्तव में, उ लोग जे हमनी के जवन कुछ नीचे भेजले बानी जा, ओकरा के सफाई अवुरी मार्गदर्शन के रूप में छिपावेला-' ......आयत के अंत तक.. '-अल्लाह परम दयालु हवे-' -Qs. अल बकरा: 159-160- के बा। साँचहू मुहाजिरीन में से हमनी के भाई, बाजार में व्यापार में व्यस्त बाड़े, आ अंसार में से हमनी के भाई, अपना संपत्ति के प्रबंधन में अपना काम में व्यस्त बाड़े। जबकि अबू हुरैरा हमेशा रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के भूख लागला पर साथ देत रहले, जब लोग मौजूद ना हो सकत रहे त ऊ हमेशा मौजूद रहले, आ जब लोग रट ना पावत रहे त ऊ रट सकत रहले.'

हदीस :


Imam Ahmad : 15443
Imam Bukhari : 115, 790, 2179, 2467, 2512, 3826, 4126, 4159, 4188, 5790, 5851, 6839
Imam Muslim : 598, 606, 3322, 3431, 4549, 4876, 5354