प्रतिनिधि हदीस
इमाम मुस्लिम : 3451
و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ سَمِعَ جَابِرًا يَسْأَلُ كَمْ كَانُوا يَوْمَ الْحُدَيْبِيَةِ قَالَ كُنَّا أَرْبَعَ عَشْرَةَ مِائَةً فَبَايَعْنَاهُ وَعُمَرُ آخِذٌ بِيَدِهِ تَحْتَ الشَّجَرَةِ وَهِيَ سَمُرَةٌ فَبَايَعْنَاهُ غَيْرَ جَدِّ بْنِ قَيْسٍ الْأَنْصَارِيِّ اخْتَبَأَ تَحْتَ بَطْنِ بَعِيرِهِ
और हमसे कहा है [मुहम्मद बिन हातिम] ने हमसे कहा है [हज्जाज] ने [इब्न जुरैज] से मुझसे कहा है [अबू अज़ ज़ुबैर] कि उसने [जाबिर] को पूछते हुए सुना, "हुदैबिया की घटना के समय कितने साथी थे?" उसने जवाब दिया, "हम एक सौ चौदह थे, फिर हमने उसके प्रति बैअत की। उमर ने उसका हाथ समुराह के पेड़ के ठीक नीचे रखा, फिर हम सबने उसके प्रति बैअत की, सिवाय जाद बिन क़ैस अल अंसारी के, उस समय वह अपने ऊँट के पेट के नीचे छिप गया।"