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114 sahabat baiat di hudaibiyyah
Imam Muslim : 3451و حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ سَمِعَ جَابِرًا يَسْأَلُ كَمْ كَانُوا يَوْمَ الْحُدَيْبِيَةِ قَالَ كُنَّا أَرْبَعَ عَشْرَةَ مِائَةً فَبَايَعْنَاهُ وَعُمَرُ آخِذٌ بِيَدِهِ تَحْتَ الشَّجَرَةِ وَهِيَ سَمُرَةٌ فَبَايَعْنَاهُ غَيْرَ جَدِّ بْنِ قَيْسٍ الْأَنْصَارِيِّ اخْتَبَأَ تَحْتَ بَطْنِ بَعِيرِهِ
अऊर हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन हातिम] हमसे [हज्जाज] से [इब्न जुरैज] बताइन हैं [अबू अज़ जुबैर] से कि उ [जाबिर] का पूछत सुने रहे, 'हुदैबिया घटना के समय साथी केतना रहे?' उन्होंने जवाब दिया कि हम एक सौ चौदह जने रहेन, तब हम उनसे निष्ठा लिहेन। उमर ने समुरा के पेड़ के ठीक नीचे आपन हाथ रखिन, फिर हम सब जा'द बिन कैस अल अंसारी के अलावा उनसे निष्ठा लिहेन, उ समय उ अपने ऊँट के पेट के नीचे छिप गए।