हदीस
Penggelap zakat memikul unta di hari kiamat
Imam Muslim : 3413حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَعَمْرٌو النَّاقِدُ وَابْنُ أَبِي عُمَرَ وَاللَّفْظُ لِأَبِي بَكْرٍ قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ أَبِي حُمَيْدٍ السَّاعِدِيِّ قَالَ اسْتَعْمَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَجُلًا مِنْ الْأَسْدِ يُقَالُ لَهُ ابْنُ اللُّتْبِيَّةِ قَالَ عَمْرٌو وَابْنُ أَبِي عُمَرَ عَلَى الصَّدَقَةِ فَلَمَّا قَدِمَ قَالَ هَذَا لَكُمْ وَهَذَا لِي أُهْدِيَ لِي قَالَ فَقَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى الْمِنْبَرِ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ وَقَالَ مَا بَالُ عَامِلٍ أَبْعَثُهُ فَيَقُولُ هَذَا لَكُمْ وَهَذَا أُهْدِيَ لِي أَفَلَا قَعَدَ فِي بَيْتِ أَبِيهِ أَوْ فِي بَيْتِ أُمِّهِ حَتَّى يَنْظُرَ أَيُهْدَى إِلَيْهِ أَمْ لَا وَالَّذِي نَفْسُ مُحَمَّدٍ بِيَدِهِ لَا يَنَالُ أَحَدٌ مِنْكُمْ مِنْهَا شَيْئًا إِلَّا جَاءَ بِهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ يَحْمِلُهُ عَلَى عُنُقِهِ بَعِيرٌ لَهُ رُغَاءٌ أَوْ بَقَرَةٌ لَهَا خُوَارٌ أَوْ شَاةٌ تَيْعِرُ ثُمَّ رَفَعَ يَدَيْهِ حَتَّى رَأَيْنَا عُفْرَتَيْ إِبْطَيْهِ ثُمَّ قَالَ اللَّهُمَّ هَلْ بَلَّغْتُ مَرَّتَيْنِ حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ قَالَا أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ أَبِي حُمَيْدٍ السَّاعِدِيِّ قَالَ اسْتَعْمَلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ابْنَ اللُّتْبِيَّةِ رَجُلًا مِنْ الْأَزْدِ عَلَى الصَّدَقَةِ فَجَاءَ بِالْمَالِ فَدَفَعَهُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ هَذَا مَالُكُمْ وَهَذِهِ هَدِيَّةٌ أُهْدِيَتْ لِي فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَفَلَا قَعَدْتَ فِي بَيْتِ أَبِيكَ وَأُمِّكَ فَتَنْظُرَ أَيُهْدَى إِلَيْكَ أَمْ لَا ثُمَّ قَامَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَطِيبًا ثُمَّ ذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ سُفْيَانَ
ई हमनी के [अबू बकर बिन अबी स्याइबा] आ [अमरू अन नकिद] आ [इब्नु अबी उमर] द्वारा बतावल गइल बा जबकि लफाज अबू बकर से बा, उ लोग कहल कि; हमनी के [सुफयान बिन उयैनह] से [अज ज़ुहरी] से ['उरवाह] से [अबू हुमैद अस सईदी] से बतवले बाड़े कि उ कहले बाड़े कि, 'रसुलुल्लाह शल्लाहु अलैहि वसल्लम अल असद कबीला के एगो आदमी के काम प रखले रहले, जेकर नाम इब्न लुथबियाह -अमरू अवुरी इब्न अबू उमर कहले रहले- -जकात- के करीब धन एकट्ठा करे खाती। उ जकात जमा करत घरी कहले कि, 'हम इ जकात आपके सौंप देनी, अवुरी इहे लोग हमरा के देले बाड़े'। अबू हुमैद कहले कि, 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब मंच प भाषण देले, अल्लाह के तारीफ अवुरी तारीफ कईला के बाद उ कहले कि, 'एक अफसर रहले, जेकरा के हम जकात वसूली के काम सौंपले रहनी, उ कहले कि, 'हम इ जकात - जमा कईले - आपके देले रहनी, अवुरी इहे लोग हमरा के देले रहले'। काहे ना खाली अपना माई-बाबूजी के घरे बइठ के लोग के उपहार पहुंचावे के इंतजार ना करेला। अल्लाह के कसम, जिनका हाथ में मुहम्मद के आत्मा बा, जब ओकरा के वसूली के काम दिहल जाई त रउआ में से केहू जकात के गबन ना करी, लेकिन कयामत के दिन उ गबन भईल ऊंट के गर्दन प मूविंग, चाहे मूइंग गाय, चाहे कुहरत बकरी के लेके जाई'। फेर उ हाथ उठवले ताकि हमनी के उनुका बगल के सफेदी देखाई देवे, फेर उ कहले: 'हे अल्लाह, हम तहरा के अयीसन कहले बानी'। उ दु बेर कहले रहले'। हमनी के बतावल गईल बा कि [इशाक बिन इब्राहिम] अवुरी [अब्द बिन हुमैद] दुनो कहले कि; हमनी के बतवले बाड़े [अब्दुर्राजाक] हमनी के [मा'मर] से [अज ज़ुहरी] से ['उरवाह] से [अबू हुमैद अस सईदी] से कहले बाड़े उ कहले बाड़े कि, 'नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर इब्न लुतबिया, यानी असद के एगो आदमी -कर्मचारी बने-, जकात लेवे खातिर नियुक्त कईले रहले, फिर उ नबी सल्लल्लाहु के लगे आईल रहले 'अलैहि वसल्लम आ मिलल जकात सौंप दिहलस। ऊ ले लिहले, फेर कहलसि कि ई ऊ जकात ह जवन हम तोहरा के दिहले रहीं, आ ईहे लोग हमरा के दिहले बा’. फेर कहले कि 'काहे ना उ सिर्फ अपना माई-बाबूजी के घरे बईठ के इ देखे के इंतजार करेले कि केहु उनुका के उपहार पहुंचाई कि ना'। एकरा बाद नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम प्रवचन देवे खातिर खड़ा हो गईले। एकरा बाद उ सुफियन’ जईसन हदीस के जिक्र कईले।