प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 2255
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ نَافِعٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَحْلُبَنَّ أَحَدٌ مَاشِيَةَ امْرِئٍ بِغَيْرِ إِذْنِهِ أَيُحِبُّ أَحَدُكُمْ أَنْ تُؤْتَى مَشْرُبَتُهُ فَتُكْسَرَ خِزَانَتُهُ فَيُنْتَقَلَ طَعَامُهُ فَإِنَّمَا تَخْزُنُ لَهُمْ ضُرُوعُ مَوَاشِيهِمْ أَطْعِمَاتِهِمْ فَلَا يَحْلُبَنَّ أَحَدٌ مَاشِيَةَ أَحَدٍ إِلَّا بِإِذْنِهِ
[अब्दुल्ला बिन यूसुफ] ने हमें [मलिक] [नफी] से [अब्दुल्ला बिन उमर रदियल्लाहु अन्हुमा] से वर्णित किया कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "किसी को भी दूसरे के मवेशियों को उसकी अनुमति के बिना नहीं दुहना चाहिए। क्या तुममें से कोई यह पसंद करेगा कि कोई उसके घर आए और दरवाजा तोड़ दे और उसकी खाद्य सामग्री ले जाए? वास्तव में, उनके मवेशियों के थन ही उनका खाद्य आपूर्ति हैं, इसलिए किसी को भी दूसरे के मवेशियों को उसकी अनुमति के बिना नहीं दुहना चाहिए।"