प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 3048
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَنْبَلٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ عَنْ ابْنِ جُرَيْجٍ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الشُّفْعَةُ فِي كُلِّ شِرْكٍ رَبْعَةٍ أَوْ حَائِطٍ لَا يَصْلُحُ أَنْ يَبِيعَ حَتَّى يُؤْذِنَ شَرِيكَهُ فَإِنْ بَاعَ فَهُوَ أَحَقُّ بِهِ حَتَّى يُؤْذِنَهُ
हमें [अहमद बिन हनबल] ने बताया है हमें [इस्माईल बिन इब्राहीम] ने [इब्न जुरैज] से [अबू अज़ ज़ुबैर] से [जाबिर] से बताया है उन्होंने कहा, "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "स्यूफ़ा (पहले खरीदने का अधिकार) प्रत्येक कब्जे वाले घर, या बगीचे में है। जब तक आप अपने साथी को सूचित नहीं करते तब तक इसे बेचना उचित नहीं है, यदि वह इसे बेचता है तो उसके साथी को इसे खरीदने का अधिकार है जब तक कि वह उसे अनुमति न दे।