इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Rumah Tangga Anak Pembuktian keturunan dengan kemiripan fisik (Qiyafah)

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Pembuktian keturunan dengan kemiripan fisik (Qiyafah)
Imam Tirmidzi : 2055

حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ دَخَلَ عَلَيْهَا مَسْرُورًا تَبْرُقُ أَسَارِيرُ وَجْهِهِ فَقَالَ أَلَمْ تَرَيْ أَنَّ مُجَزِّزًا نَظَرَ آنِفًا إِلَى زَيْدِ بْنِ حَارِثَةَ وَأُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ فَقَالَ هَذِهِ الْأَقْدَامُ بَعْضُهَا مِنْ بَعْضٍقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رَوَى ابْنُ عُيَيْنَةَ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ وَزَادَ فِيهِ أَلَمْ تَرَيْ أَنَّ مُجَزِّزًا مَرَّ عَلَى زَيْدِ بْنِ حَارِثَةَ وَأُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ قَدْ غَطَّيَا رُءُوسَهُمَا وَبَدَتْ أَقْدَامُهُمَا فَقَالَ إِنَّ هَذِهِ الْأَقْدَامَ بَعْضُهَا مِنْ بَعْضٍ وَهَكَذَا حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَغَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ سُفْيَانَ بْنِ عُيَيْنَةَ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ احْتَجَّ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ بِهَذَا الْحَدِيثِ فِي إِقَامَةِ أَمْرِ الْقَافَةِ

हमनी के [कुतैबा] के बतवले बा; हमनी के [अल लैतस] के [इब्न शिहाब] से ['उर्वाह] से ['ऐस्याह] से बतवले बाड़े कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर उनुका से खुशहाल हालत में चमकत चेहरा के संगे मिलल रहले अवुरी कहले रहले कि, 'का रउआ ना देखनी कि मुजाजीज जैद बिन हरित्साह अवुरी उसामा बिन जैद के ओर देखत रहले?' ऊ फेरु कहले, 'साँचहू ई गोड़, एकर कुछ हिस्सा दोसरा हिस्सा से आवेला'. अबू ईसा कहले कि; ई एगो सच्चे हसन हदीस ह। इब्न उयैनाह एह हदीस के अज़ ज़ुहरी से उरवाह से 'ऐस्याह से बतवले बाड़न, आ एह में अउरी कुछ जोड़ दिहले बाड़न; 'का रउरा ना देखनी कि मुजज्जीज जैद बिन हरिथह आ उसामा बिन जैद के पास से गुजरले, दुनु जने के माथा ढंकले रहे, जबकि गोड़ लउकत रहे?' तब कहलन कि साँचहू ई गोड़, कुछ दोसरा से आवेला. आ एही तरे [सैद बिन अब्दुररहमान] आ अउरी लोग [सुफयान बिन उयैनह] से [जुहरी] से [उर्वाह] से [आयशा] से ई हदीस बतवले बा। आ ई हदीस हसन सहीह ह। कुछ विद्वान लोग एह हदीस के साथ बहस कइले बा, यानी कि अल कफाह के मामला के कायम राखे के हुकुम के संबंध में।

हदीस :

Imam Ahmad : 22970, 23385, 24708
Imam Bukhari : 3452, 6272, 6273
Imam Muslim : 2647, 2648, 2649
Imam Tirmidzi : 2055
Imam Nasa'i : 3436, 3437
Imam Ibnu Majah : 2340