प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 3691
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا لَيْثٌ عَنْ يَحْيَى عَنْ نَافِعٍ أَنَّ ابْنَ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا ذُكِرَ لَهُ أَنَّ سَعِيدَ بْنَ زَيْدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ نُفَيْلٍ وَكَانَ بَدْرِيًّا مَرِضَ فِي يَوْمِ جُمُعَةٍ فَرَكِبَ إِلَيْهِ بَعْدَ أَنْ تَعَالَى النَّهَارُ وَاقْتَرَبَتْ الْجُمُعَةُ وَتَرَكَ الْجُمُعَةَ وَقَالَ اللَّيْثُ حَدَّثَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ قَالَ حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ أَنَّ أَبَاهُ كَتَبَ إِلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْأَرْقَمِ الزُّهْرِيِّ يَأْمُرُهُ أَنْ يَدْخُلَ عَلَى سُبَيْعَةَ بِنْتِ الْحَارِثِ الْأَسْلَمِيَّةِ فَيَسْأَلَهَا عَنْ حَدِيثِهَا وَعَنْ مَا قَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ حِينَ اسْتَفْتَتْهُ فَكَتَبَ عُمَرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْأَرْقَمِ إِلَى عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ يُخْبِرُهُ أَنَّ سُبَيْعَةَ بِنْتَ الْحَارِثِ أَخْبَرَتْهُأَنَّهَا كَانَتْ تَحْتَ سَعْدِ بْنِ خَوْلَةَ وَهُوَ مِنْ بَنِي عَامِرِ بْنِ لُؤَيٍّ وَكَانَ مِمَّنْ شَهِدَ بَدْرًا فَتُوُفِّيَ عَنْهَا فِي حَجَّةِ الْوَدَاعِ وَهِيَ حَامِلٌ فَلَمْ تَنْشَبْ أَنْ وَضَعَتْ حَمْلَهَا بَعْدَ وَفَاتِهِ فَلَمَّا تَعَلَّتْ مِنْ نِفَاسِهَا تَجَمَّلَتْ لِلْخُطَّابِ فَدَخَلَ عَلَيْهَا أَبُو السَّنَابِلِ بْنُ بَعْكَكٍ رَجُلٌ مِنْ بَنِي عَبْدِ الدَّارِ فَقَالَ لَهَا مَا لِي أَرَاكِ تَجَمَّلْتِ لِلْخُطَّابِ تُرَجِّينَ النِّكَاحَ فَإِنَّكِ وَاللَّهِ مَا أَنْتِ بِنَاكِحٍ حَتَّى تَمُرَّ عَلَيْكِ أَرْبَعَةُ أَشْهُرٍ وَعَشْرٌ قَالَتْ سُبَيْعَةُ فَلَمَّا قَالَ لِي ذَلِكَ جَمَعْتُ عَلَيَّ ثِيَابِي حِينَ أَمْسَيْتُ وَأَتَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلْتُهُ عَنْ ذَلِكَ فَأَفْتَانِي بِأَنِّي قَدْ حَلَلْتُ حِينَ وَضَعْتُ حَمْلِي وَأَمَرَنِي بِالتَّزَوُّجِ إِنْ بَدَا لِيتَابَعَهُ أَصْبَغُ عَنْ ابْنِ وَهْبٍ عَنْ يُونُسَ وَقَالَ اللَّيْثُ حَدَّثَنِي يُونُسُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ وَسَأَلْنَاهُ فَقَالَ أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ ثَوْبَانَ مَوْلَى بَنِي عَامِرِ بْنِ لُؤَيٍّ أَنَّ مُحَمَّدَ بْنَ إِيَاسِ بْنِ الْبُكَيْرِ وَكَانَ أَبُوهُ شَهِدَ بَدْرًا أَخْبَرَهُ
[कुतैबा बिन सईद] ने हमें [लैथ] [याह्या] से [नफी] से बताया है कि [इब्न उमर RAa] को बताया गया था कि सईद बिन ज़ैद बिन अमरू बिन नुफैल, बद्र की लड़ाई में भाग लेने वाले हमलावरों में से एक, शुक्रवार को बीमार था। फिर इब्न उमर RAa दोपहर में घुड़सवारी करते हुए उनके पास आए और शुक्रवार की नमाज़ का समय करीब था और उन्होंने शुक्रवार की नमाज़ नहीं पढ़ी थी। और यह कहा गया है [अल लैथ] ने मुझे [यूनुस] से [इब्न सय्यहाब] से वर्णित किया है, ने मुझे ['उबैदुल्लाह बिन अब्दुल्ला बिन 'उतबा] से वर्णित किया है कि उनके पिता ने ['उमर बिन अब्दुल्ला बिन अल अर्कम अज़ ज़ुहरी] को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्हें [सुबैया बिन्त अल हारिथ अल असलमिय्या] के पास जाने और उससे उस हदीस के बारे में पूछने के लिए कहा था जो उसने बताई थी और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उससे क्या कहा था जब उसने उससे फतवा मांगा था। तो 'उमर बिन अब्दुल्ला बिन अल अर्कम ने अब्दुल्ला बिन 'उतबा को जवाब में एक पत्र लिखा और उसे सूचित किया कि सुबैया बिन्त अल हारिथ ने उसे सूचित किया था कि वह साद बिन खवला की देखभाल में थी, वह बानी 'अमीर बिन लु'ए के वंशजों से थी और वह भी युद्ध में भाग लेने वालों में से थी। फिर साद की मौत हो गई जब हाजी वदा और सुबैया प्रेग्नेंट थीं और फिर साद की मौत के कुछ समय बाद ही उसने बच्चे को जन्म दिया। जब उसका डिलीवरी का समय खत्म हो जाता है, तो वह उस इंसान के लिए सजती है जो उसका हाथ मांगना चाहता है। तो बनी अब्दिद दार का एक आदमी अबू अस-सनाबिल बिन बाकक उसके पास आया और उससे कहा; "मैं समझता हूँ कि तुम्हें किसी ऐसे इंसान के सामने सजदा नहीं करना चाहिए जो तुम्हें शादी के लिए प्रपोज़ करे। क्योंकि, अल्लाह की कसम, तुम्हें चार महीने और दस दिन का समय बीत जाने तक शादी नहीं करनी चाहिए।" सुबैया ने कहा; "उनके ऐसा कहने के बाद, मैंने दोपहर में अपने कपड़े पैक किए और फिर मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिली और फिर मैंने उनसे इस बारे में पूछा। उन्होंने मुझे जवाब में फतवा दिया कि जब मैंने बच्चे को जन्म दिया तो मैं हलाल थी और उन्होंने कहा कि अगर मैं चाहूँ तो शादी कर सकती हूँ"। इस हदीस को [इब्न वहब] की [यूनुस] की [अशबाग] से भी लिया गया है। और अल लैट्स ने कहा, उसने मुझे इब्न शिहाब से यूनुस के बारे में बताया था; "और हमने उससे पूछा और उसने कहा; मुहम्मद बिन 'अब्दुर रहमान बिन त्सुबान, मौला बानी 'अमीर बिन लु'ए, ने मुझे बताया है कि मुहम्मद बिन इयास बिन अल बुकैर, जिनके पिता बद्र की लड़ाई में हिस्सा लेने वालों में से एक थे, ने उन्हें बताया है।"