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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Perbudakan Hak dan Kewajiban antara Tuan dan Budak Budak yang memenuhi hak allah dan hak tuannya mendapatkan dua pahala

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Budak yang memenuhi hak allah dan hak tuannya mendapatkan dua pahala
Imam Tirmidzi : 2306

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ حَدَّثَنَا أَبُو سِنَانٍ الشَّيْبَانِيُّ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ الرَّجُلُ يَعْمَلُ الْعَمَلَ فَيُسِرُّهُ فَإِذَا اطُّلِعَ عَلَيْهِ أَعْجَبَهُ ذَلِكَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَهُ أَجْرَانِ أَجْرُ السِّرِّ وَأَجْرُ الْعَلَانِيَةِقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ وَقَدْ رَوَى الْأَعْمَشُ وَغَيْرُهُ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مُرْسَلًا وَأَصْحَابُ الْأَعْمَشِ لَمْ يَذْكُرُوا فِيهِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى وَقَدْ فَسَّرَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ هَذَا الْحَدِيثَ فَقَالَ إِذَا اطُّلِعَ عَلَيْهِ فَأَعْجَبَهُ فَإِنَّمَا مَعْنَاهُ أَنْ يُعْجِبَهُ ثَنَاءُ النَّاسِ عَلَيْهِ بِالْخَيْرِ لِقَوْلِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْتُمْ شُهَدَاءُ اللَّهِ فِي الْأَرْضِ فَيُعْجِبُهُ ثَنَاءُ النَّاسِ عَلَيْهِ لِهَذَا لِمَا يَرْجُو بِثَنَاءِ النَّاسِ عَلَيْهِ فَأَمَّا إِذَا أَعْجَبَهُ لِيَعْلَمَ النَّاسُ مِنْهُ الْخَيْرَ لِيُكْرَمَ عَلَى ذَلِكَ وَيُعَظَّمَ عَلَيْهِ فَهَذَا رِيَاءٌ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ إِذَا اطُّلِعَ عَلَيْهِ فَأَعْجَبَهُ رَجَاءَ أَنْ يَعْمَلَ بِعَمَلِهِ فَيَكُونُ لَهُ مِثْلُ أُجُورِهِمْ فَهَذَا لَهُ مَذْهَبٌ أَيْضًا

हमनी के बतवले बाड़े [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] हमनी के बतवले बाड़े [अबू दाउद] हमनी के बतवले बाड़े [अबू सिनान असी स्याबानी] से [हबीब बिन अबू थाबीत] से [अबू सालिह] से [अबू हुरैरा] से उ कहले कि: केहु कहले कि: हे अल्लाह के रसूलुल्लाह, केहु रहे जवन कि एगो काम कईले रहे अवुरी ओकरा बाद उ एकरा के गुप्त रखले रहले लेकिन जब उ लोग के पता चलल त उ अचरज में पड़ गईले इ। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसलाम कहले कि, ओकरा खातिर दू गो इनाम बा; जवन इनाम ऊ गुप्त राखेला आ जवन इनाम उजागर करेला'. अबू ईसा कहले कि: इ हदीस हसन घरीब, [अल अमासी] अवुरी बाकी लोग एकरा के [हबीब बिन अबू थाबीत] से [अबू सालिह] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सलाम से मुरसल में बतवले बाड़े, अवुरी अल अमासी के साथी लोग हदीस में नईखन बतवले: अबू हुरैरा से। अबू ईसा कहले: कुछ विद्वान लोग एह हदीस के व्याख्या करत कहले कि, अगर इ हदीस के बारे में पता चलल बा अवुरी उ एकरा से हैरान बाड़े त एकर मतलब बा कि उ उनुका खाती लोग के निमन तारीफ से हैरान बाड़े, काहेंकी अल्लाह के रसूलुल्लाह (स.अ.व.) कहले रहले कि, "तू लोग धरती प अल्लाह के गवाह बानी।" नतीजा ई भइल कि लोग के उनकर तारीफ खाली शहादा - मानवीय गवाही - खातिर होला जवना के उम्मीद कइल जाला। हालांकि अगर ऊ अचरज में पड़ जाला कि लोग ओकर भलाई के जान लेव जेहसे कि ओकरा खातिर ओह लोग के आदर आ महिमामंडन होखे त एकरा के देखावा कहल जाला. आ कुछ विद्वानन के राय बा कि अगर उनकर करनी लोग के मालूम बा त ऊ एह उमेद में अचरज में पड़ जाला कि ऊ जवन करीहें ऊ लोग कर दी जेहसे कि उनुका जइसन इनाम मिल जाव, तब दोसर राय बा.

हदीस :

Imam Ahmad : 7119, 8708, 18743, 18894
Imam Muslim : 2563, 3145
Imam Abu Dawud : 1757
Imam Tirmidzi : 2306
Imam Nasa'i : 3293
Imam Ibnu Majah : 4216