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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Wanita, Nikah dan Jima Nikah Pentingnya meminta pendapat janda dan persetujuan gadis sebelum Nikah

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Pentingnya meminta pendapat janda dan persetujuan gadis sebelum Nikah
Imam Tirmidzi : 1025

حَدَّثَنَا إِسْحَقُ بْنُ مَنْصُورٍ أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ حَدَّثَنَا الْأَوْزَاعِيُّ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تُنْكَحُ الثَّيِّبُ حَتَّى تُسْتَأْمَرَ وَلَا تُنْكَحُ الْبِكْرُ حَتَّى تُسْتَأْذَنَ وَإِذْنُهَا الصُّمُوتُقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ عُمَرَ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَعَائِشَةَ وَالْعُرْسِ بْنِ عَمِيرَةَ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنَّ الثَّيِّبَ لَا تُزَوَّجُ حَتَّى تُسْتَأْمَرَ وَإِنْ زَوَّجَهَا الْأَبُ مِنْ غَيْرِ أَنْ يَسْتَأْمِرَهَا فَكَرِهَتْ ذَلِكَ فَالنِّكَاحُ مَفْسُوخٌ عِنْدَ عَامَّةِ أَهْلِ الْعِلْمِ وَاخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي تَزْوِيجِ الْأَبْكَارِ إِذَا زَوَّجَهُنَّ الْآبَاءُ فَرَأَى أَكْثَرُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَهْلِ الْكُوفَةِ وَغَيْرِهِمْ أَنَّ الْأَبَ إِذَا زَوَّجَ الْبِكْرَ وَهِيَ بَالِغَةٌ بِغَيْرِ أَمْرِهَا فَلَمْ تَرْضَ بِتَزْوِيجِ الْأَبِ فَالنِّكَاحُ مَفْسُوخٌ و قَالَ بَعْضُ أَهْلِ الْمَدِينَةِ تَزْوِيجُ الْأَبِ عَلَى الْبِكْرِ جَائِزٌ وَإِنْ كَرِهَتْ ذَلِكَ وَهُوَ قَوْلُ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ وَالشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَقَ

हमनी के बतवले बाड़े [इशक बिन मंशूर], बता देले बाड़े [मुहम्मद बिन यूसुफ], बता देले बाड़े [अल औजाई] से [याह्या बिन अबू कथिर] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैरा] से कहले बाड़े; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहले कि, जब तक विधवा के बियाह तब तक ना होखे के चाही, जब तक ओकरा से अनुमति ना मांगल जाए अवुरी ओकर राय ना पूछल जाए, जबकि लईकी के बियाह तब तक ना करे के चाही, जब तक कि ओकर अनुमति ना मांगल जाए। ओकर अनुमति ओकर चुप्पी ह'। -अबू ईसा तिरमिधी में- कहले; 'हदीस उमर, इब्न अब्बास ऐसिया आ अल उर्स बिन अमीराह से रिवायत भइल बा। अबू ईसा कहले कि; 'अबू हुरैरा के हदीस हसन के सच्चे हदीस ह।' एह हदीस के अमल में विद्वान लोग के राय बा; जबले विधवा के बियाह तबले ना हो सके जबले ओकरा से ओकर राय आ अनुमति ना लिहल जाव. अगर ओकर बाप ओकरा से बिना ओकरा से बियाह कर लेव, आ ओकरा ई पसंद ना आवे त सामान्य रूप से अधिकतर विद्वानन के मुताबिक बियाह टूटल आ शून्य बा. कुंवारी के बियाह करे के मुद्दा प विद्वान लोग के मतभेद बा, जदी उनुकर पिता उनुका से बियाह क देले। कुफा आ अउरी जगहन के अधिकतर विद्वान लोग के मानना बा कि अगर कवनो पिता कुंवारी के बिना अनुमति के यौवन भइला के बाद ओकर बियाह कर लेव आ बियाह के स्वीकार करे के तइयार ना होखे त ऊ बियाह अमान्य हो जाला. मदीना के कुछ निवासी लोग के मानना बा कि बियाह नापसंद होखला के बावजूद भी जरुरी बा। मलिक बिन अनस, स्याफीई, अहमद, आ इशाक के भी इहे राय बा।

हदीस :


Imam Ahmad : 9232
Imam Bukhari : 4741, 6453, 6455, 6456
Imam Muslim : 2543, 2544
Imam Abu Dawud : 1791
Imam Tirmidzi : 1025
Imam Nasa'i : 3213, 3215
Imam Ibnu Majah : 1861
Imam Darimi : 2091, 2093