Hadith Representative
Ibnu Hajjaj membongkar dan mengembalikan ka'bah seperti semula
Imam Nasa'i : 2861أَخْبَرَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ عَنْ ابْنِ أَبِي زَائِدَةَ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي سُلَيْمَانَ عَنْ عَطَاءٍ قَالَ ابْنُ الزُّبَيْرِ سَمِعْتُ عَائِشَةَ تَقُولُإِنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَوْلَا أَنَّ النَّاسَ حَدِيثٌ عَهْدُهُمْ بِكُفْرٍ وَلَيْسَ عِنْدِي مِنْ النَّفَقَةِ مَا يُقَوِّي عَلَى بِنَائِهِ لَكُنْتُ أَدْخَلْتُ فِيهِ مِنْ الْحِجْرِ خَمْسَةَ أَذْرُعٍ وَجَعَلْتُ لَهُ بَابًا يَدْخُلُ النَّاسُ مِنْهُ وَبَابًا يَخْرُجُونَ مِنْهُ
हमका [हन्नाद बिन अस सारी] [इब्न अबी जैदा] से रिपोर्ट किहिन हैं, उ कहिन; हमका ['अथो`] से [इब्न अबी सुलेमान] बताइस है, [इब्न अज़ जुबैर] कहिन; हम [ऐस्याह] का कहत सुने रहेन; पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'अगर मनुष्य कफिर के समय के करीब न होत, अऊर मोर पास ओकरे निर्माण का समर्थन करै के लिए धन न होत, तौ मैं वहिके ऊपर पाँच हाथ के हिजर लगावत, अऊर मैं वहिके लिए एक दरवाजा बनावत जेहिसे मनुष्य घुस सकै, अऊर एक दरवाजा जेहिसे उ बाहर निकल सकत।'