हदीस
Nabi SAW tidak terlalu mempersoalkan pada hari apa saja beliau berpuasa
Imam Ibnu Majah : 1699حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ يَزِيدَ الرِّشْكِ عَنْ مُعَاذَةَ الْعَدَوِيَّةِ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّهَا قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصُومُ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ مِنْ كُلِّ شَهْرٍ قُلْتُ مِنْ أَيِّهِ قَالَتْ لَمْ يَكُنْ يُبَالِي مِنْ أَيِّهِ كَانَ
हमनी के बतावल गइल बा [अबू बकर बिन अबू स्याइबा] कहले बाड़न, हमनी के [गुंदर] के [स्यूबाह] से [यजीद अर रिसिक] से [मुअदजाह अल अदावीयह] से [आइस्याह] से बतावल गइल बा ऊ कहले बाड़न कि रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हर महीना में तीन दिन रोजा करत रहले. ' हम पूछनी, 'कवन दिन बा?' उ जवाब देले कि, 'उनुका कवनो खास परवाह नईखे कि कवन दिन बा।' ' 1999 में भइल रहे।