इस्लाम स्वीकार करें, यहाँ क्लिक करें
इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



-

हदीस खोज परिणाम :
कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम मुस्लिम : 1953

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ عَنْ سَعِيدٍ الْجُرَيْرِيِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ قَالَ قُلْتُ لِعَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا هَلْ كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصُومُ شَهْرًا مَعْلُومًا سِوَى رَمَضَانَ قَالَتْ وَاللَّهِ إِنْ صَامَ شَهْرًا مَعْلُومًا سِوَى رَمَضَانَ حَتَّى مَضَى لِوَجْهِهِ وَلَا أَفْطَرَهُ حَتَّى يُصِيبَ مِنْهُ

उन्होंने कहा, "यह्या बिन यह्या ने हमें [यज़ीद बिन ज़ुराई] [सैद अल जुरैरी] से [अब्दुल्ला बिन सयाक़िक] से बताया था, मैंने [ऐस्या] से पूछा, "क्या पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रमज़ान के महीने के अलावा कभी पूरे महीने खुलेआम रोज़ा रखा है?" ऐस्या ने जवाब दिया, "अल्लाह की कसम, उन्होंने रमज़ान के महीने के अलावा कभी पूरे महीने खुलेआम रोज़ा नहीं रखा, जब तक कि उन्हें अर रफ़ी अल अला (एक ऊँचा पद) नहीं दिया गया, और उन्होंने रमज़ान के अलावा पूरे महीने लगातार रोज़ा नहीं तोड़ा (मतलब रोज़ा नहीं रखा), जब तक कि उन्होंने उसमें से कुछ हिस्सा रोज़े से पूरा नहीं कर लिया।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 23198, 23932, 24893
इमाम मुस्लिम : 1953, 1954