प्रतिनिधि हदीस
इमाम अबू दाऊद : 1015
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَزِيدَ الْهُنَائِيِّ قَالَسَأَلْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ عَنْ قَصْرِ الصَّلَاةِ فَقَالَ أَنَسٌ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا خَرَجَ مَسِيرَةَ ثَلَاثَةِ أَمْيَالٍ أَوْ ثَلَاثَةِ فَرَاسِخَ شَكَّ شُعْبَةُ يُصَلِّي رَكْعَتَيْنِ
उन्होंने कहा, "मुहम्मद बिन बस्यार ने हमें बताया है, मुहम्मद बिन जाफर ने हमें बताया है, स्यूबा ने हमें बताया है, याह्या बिन यजीद अल हुनई ने कहा है; मैंने अनस बिन मलिक से नमाज़ की क़यामत के बारे में पूछा, तो अनस ने जवाब दिया, "जब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तीन मील या तीन फरसख का सफ़र करते थे - शुबा को शक होता था - तो वह दो रकअत नमाज़ पढ़ते थे।"