हदीस
Melihat Amirul mukminin atau seseorang salam dua kali
Imam Muslim : 914حَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ شُعْبَةَ عَنْ الْحَكَمِ وَمَنْصُورٍ عَنْ مُجَاهِدٍ عَنْ أَبِي مَعْمَرٍ أَنَّ أَمِيرًا كَانَ بِمَكَّةَ يُسَلِّمُ تَسْلِيمَتَيْنِ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ أَنَّى عَلِقَهَا قَالَ الْحَكَمُ فِي حَدِيثِهِ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يَفْعَلُهُ
हमनी के बतवले बाड़े [जुहैर बिन हर्ब] हमनी के [याह्या बिन सैद] [स्यूबाह] से [अल हकम] से अवुरी [मंसूर] [मुजाहिद] से [अबू मा'मर] से बतवले बाड़े, मक्का में एगो शासक एक बेर दु बेर नमस्कार कईले रहले, फेर [अब्दुल्लाह] पूछले रहले; 'उ कहाँ से मिलल उ बात?' अल हकम अपना हदीस में कहले बाड़न कि; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर कइले रहले'।