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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 410

حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ عَنْ أَبِي التَّيَّاحِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ قَالَقَدِمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْمَدِينَةَ فَنَزَلَ أَعْلَى الْمَدِينَةِ فِي حَيٍّ يُقَالُ لَهُمْ بَنُو عَمْرِو بْنِ عَوْفٍ فَأَقَامَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِيهِمْ أَرْبَعَ عَشْرَةَ لَيْلَةً ثُمَّ أَرْسَلَ إِلَى بَنِي النَّجَّارِ فَجَاءُوا مُتَقَلِّدِي السُّيُوفِ كَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى رَاحِلَتِهِ وَأَبُو بَكْرٍ رِدْفُهُ وَمَلَأُ بَنِي النَّجَّارِ حَوْلَهُ حَتَّى أَلْقَى بِفِنَاءِ أَبِي أَيُّوبَ وَكَانَ يُحِبُّ أَنْ يُصَلِّيَ حَيْثُ أَدْرَكَتْهُ الصَّلَاةُ وَيُصَلِّي فِي مَرَابِضِ الْغَنَمِ وَأَنَّهُ أَمَرَ بِبِنَاءِ الْمَسْجِدِ فَأَرْسَلَ إِلَى مَلَإٍ مِنْ بَنِي النَّجَّارِ فَقَالَ يَا بَنِي النَّجَّارِ ثَامِنُونِي بِحَائِطِكُمْ هَذَا قَالُوا لَا وَاللَّهِ لَا نَطْلُبُ ثَمَنَهُ إِلَّا إِلَى اللَّهِ فَقَالَ أَنَسٌ فَكَانَ فِيهِ مَا أَقُولُ لَكُمْ قُبُورُ الْمُشْرِكِينَ وَفِيهِ خَرِبٌ وَفِيهِ نَخْلٌ فَأَمَرَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِقُبُورِ الْمُشْرِكِينَ فَنُبِشَتْ ثُمَّ بِالْخَرِبِ فَسُوِّيَتْ وَبِالنَّخْلِ فَقُطِعَ فَصَفُّوا النَّخْلَ قِبْلَةَ الْمَسْجِدِ وَجَعَلُوا عِضَادَتَيْهِ الْحِجَارَةَ وَجَعَلُوا يَنْقُلُونَ الصَّخْرَ وَهُمْ يَرْتَجِزُونَ وَالنَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَعَهُمْ وَهُوَ يَقُولُ اللَّهُمَّ لَا خَيْرَ إِلَّا خَيْرُ الْآخِرَهْفَاغْفِرْ لِلْأَنْصَارِ وَالْمُهَاجِرَهْ

हमें [मुसद्दद] ने बताया है, हमें [अब्दुल वारित्स] को [अबू अत तय्याह] से [अनस बिन मलिक] ने बताया है, "पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना पहुंचे और बानी अमरू बिन औफ के गांव में रुके, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वहां चौदह रातों तक रहे। फिर उन्होंने किसी को बानी नज्जर से मिलने के लिए भेजा, तो वे अपने शरीर पर तलवारें लेकर आए। मैंने पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को उनके घोड़े पर देखा, जबकि अबू बकर उनके पीछे सवार थे और बानू नज्जर के नेता उनके चारों ओर थे जब तक कि वह अबू अय्यूब के कुएं तक नहीं पहुंच गए। वह प्रार्थना का समय होने पर तुरंत प्रार्थना करना पसंद करते थे, इसलिए उन्होंने बकरे के बाड़े में प्रार्थना की अल्लाह। हम इसे अल्लाह के अलावा किसी को नहीं बेचेंगे!" अनस ने कहा, "मैं तुमसे कहता हूँ कि उस बगीचे में मुशरिकों की बहुत सी कब्रें हैं, टूटे-फूटे घरों और खजूर के पेड़ों के बचे हुए हिस्से भी हैं। तो पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हुक्म दिया कि कब्रों को तोड़ दिया जाए, टूटे-फूटे घरों को समतल कर दिया जाए और खजूर के पेड़ों को उखाड़कर मस्जिद के क़िबले की दिशा में कर दिया जाए। फिर उन्होंने पेड़ों से मस्जिद का दरवाज़ा बनाया और नशीद गाते हुए ईंटें ढोईं। और पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी उनके साथ काम किया और कहा: "हे अल्लाह! आख़िरत की भलाई के अलावा कोई भलाई नहीं है, इसलिए अंसार और मुहाजिरीन को माफ़ कर दो।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 8594, 12731, 13072
इमाम बुखारी : 410, 1735, 1964, 2564, 2567, 2571, 3639
इमाम मुस्लिम : 816
इमाम अबू दाऊद : 383
इमाम नसाई : 695