प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 142
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ عَنْ عَمِّهِ وَاسِعِ بْنِ حَبَّانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ إِنَّ نَاسًا يَقُولُونَ إِذَا قَعَدْتَ عَلَى حَاجَتِكَ فَلَا تَسْتَقْبِلْ الْقِبْلَةَ وَلَا بَيْتَ الْمَقْدِسِ فَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ لَقَدْ ارْتَقَيْتُ يَوْمًا عَلَى ظَهْرِ بَيْتٍ لَنَا فَرَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى لَبِنَتَيْنِ مُسْتَقْبِلًا بَيْتَ الْمَقْدِسِ لِحَاجَتِهِ وَقَالَ لَعَلَّكَ مِنْ الَّذِينَ يُصَلُّونَ عَلَى أَوْرَاكِهِمْ فَقُلْتُ لَا أَدْرِي وَاللَّهِقَالَ مَالِكٌ يَعْنِي الَّذِي يُصَلِّي وَلَا يَرْتَفِعُ عَنْ الْأَرْضِ يَسْجُدُ وَهُوَ لَاصِقٌ بِالْأَرْضِ
[अब्दुल्ला बिन यूसुफ] ने हमें बताया, [मलिक] ने हमें [याह्या बिन सईद] [मुहम्मद बिन याह्या बिन हिब्बान] से उनके चाचा [वासी बिन हिब्बान] से [अब्दुल्ला बिन उमर] से बताया कि उन्होंने कहा, "लोग कहते हैं, "जब तुम अपनी ज़रूरत पूरी करो, तो क़िबला या बैतुल मक़दिस की दिशा में मुँह मत करो।" 'अब्दुल्ला बिन उमर ने फिर कहा, "एक दिन मैं अपने घर की छत पर गया, और मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) को दो दीवारों के बीच बैतुल मक़दिस की ओर मुँह करके पेशाब करते देखा। फिर किसी ने कहा, "शायद तुम उन लोगों में से हो जो अपनी जांघों को (ज़मीन से) सटाकर नमाज़ पढ़ते हैं?" मैंने कहा, "अल्लाह की कसम, मुझे नहीं पता।" मलिक ने कहा, "जो लोग नमाज़ पढ़ते हैं लेकिन सजदा करते समय (जांघों को) ज़मीन से नहीं उठाते, यानी ज़मीन को छूते हैं।"