प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 749
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ سُلَيْمَانَ قَالَ سَمِعْتُ زَيْدَ بْنَ وَهْبٍ قَالَ رَأَى حُذَيْفَةُرَجُلًا لَا يُتِمُّ الرُّكُوعَ وَالسُّجُودَ قَالَ مَا صَلَّيْتَ وَلَوْ مُتَّ مُتَّ عَلَى غَيْرِ الْفِطْرَةِ الَّتِي فَطَرَ اللَّهُ مُحَمَّدًا صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَيْهَا
हमसे [हफ़्श बिन उमर] ने कहा है, हमसे [स्यूबा] से [सुलेमान] ने कहा है, "मैंने [ज़ैद बिन वहब] को कहते सुना," [हुदज़ैफ़ा] ने किसी को नमाज़ पढ़ते देखा लेकिन उसने रुकू और सजदा पूरा नहीं किया। तो उसने कहा, "तुमने नमाज़ नहीं पढ़ी। अगर तुम मरोगे, तो तुम फ़ितरा (धर्म) के बाहर मरोगे, भले ही अल्लाह ने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इससे ऊपर बनाया है।"