प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 3270
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سِنَانٍ حَدَّثَنَا سَلِيمُ بْنُ حَيَّانَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مِينَاءَ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَثَلِي وَمَثَلُ الْأَنْبِيَاءِ كَرَجُلٍ بَنَى دَارًا فَأَكْمَلَهَا وَأَحْسَنَهَا إِلَّا مَوْضِعَ لَبِنَةٍ فَجَعَلَ النَّاسُ يَدْخُلُونَهَا وَيَتَعَجَّبُونَ وَيَقُولُونَ لَوْلَا مَوْضِعُ اللَّبِنَةِ
मुहम्मद बिन सिनान ने हमें बताया है, सलीम बिन हय्यान ने हमें बताया है, सईद बिन मियना ने हमें बताया है, जाबिर बिन अब्दुल्लाह र.अ. ने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मेरी और मुझसे पहले के नबियों की मिसाल ऐसी है जैसे किसी ने एक घर बनाया और फिर उसे पूरा किया और सुंदर बनाया, सिवाय इसके कि वहाँ एक लबीना (एक ऐसी जगह जहाँ ईंटें अधूरी रह गईं) थी, फिर लोग घर में घुसे और हैरान होकर कहने लगे; 'काश, यह लबीना पूरा होता!'"