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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



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हदीस खोज परिणाम :
कुल हदीस : 1
प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 3270

حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سِنَانٍ حَدَّثَنَا سَلِيمُ بْنُ حَيَّانَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مِينَاءَ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَثَلِي وَمَثَلُ الْأَنْبِيَاءِ كَرَجُلٍ بَنَى دَارًا فَأَكْمَلَهَا وَأَحْسَنَهَا إِلَّا مَوْضِعَ لَبِنَةٍ فَجَعَلَ النَّاسُ يَدْخُلُونَهَا وَيَتَعَجَّبُونَ وَيَقُولُونَ لَوْلَا مَوْضِعُ اللَّبِنَةِ

मुहम्मद बिन सिनान ने हमें बताया है, सलीम बिन हय्यान ने हमें बताया है, सईद बिन मियना ने हमें बताया है, जाबिर बिन अब्दुल्लाह र.अ. ने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "मेरी और मुझसे पहले के नबियों की मिसाल ऐसी है जैसे किसी ने एक घर बनाया और फिर उसे पूरा किया और सुंदर बनाया, सिवाय इसके कि वहाँ एक लबीना (एक ऐसी जगह जहाँ ईंटें अधूरी रह गईं) थी, फिर लोग घर में घुसे और हैरान होकर कहने लगे; 'काश, यह लबीना पूरा होता!'"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 7020, 7173, 7768, 8802, 10645, 14359, 20291, 20292
इमाम बुखारी : 3270, 3271
इमाम मुस्लिम : 4237, 4238, 4239, 4240
इमाम तिर्मिदज़ी : 2789, 3546