हदीस
Rasulullah shallallahu 'alaihi wasallam melaksanakan shalat 'Ashar sedangkan matahari belum berlalu dari kamarnya (rumah 'Aisyah)
Imam Tirmidzi : 147حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ أَنَّهَا قَالَتْصَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْعَصْرَ وَالشَّمْسُ فِي حُجْرَتِهَا وَلَمْ يَظْهَرْ الْفَيْءُ مِنْ حُجْرَتِهَاقَالَ وَفِي الْبَاب عَنْ أَنَسٍ وَأَبِي أَرْوَى وَجَابِرٍ وَرَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ قَالَ وَيُرْوَى عَنْ رَافِعٍ أَيْضًا عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي تَأْخِيرِ الْعَصْرِ وَلَا يَصِحُّ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَائِشَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَهُوَ الَّذِي اخْتَارَهُ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنْهُمْ عُمَرُ وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْعُودٍ وَعَائِشَةُ وَأَنَسٌ وَغَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ التَّابِعِينَ تَعْجِيلَ صَلَاةِ الْعَصْرِ وَكَرِهُوا تَأْخِيرَهَا وَبِهِ يَقُولُ عَبْدُ اللَّهِ ابْنُ الْمُبَارَكِ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَقُ
हमनी के बतवले बा [कुतैबाह] कहले बा; हमनी के [अल लैट्स] से [इब्न शिहाब] से [उर्वाह] से ['ऐस्याह] से बतवले बाड़े कि उ कहले बाड़े; 'अल्लाह के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक बेर दुपहरिया के नमाज कईले रहले, जबकि सूरज के रोशनी उनुका कमरा में घुस गईल रहे, अवुरी उनुका कमरा में कवनो छाया ना रहे'। ऊ कहले कि; 'एह अध्याय में अनस, अबू अरवा, जाबिर, आ रफी' बिन खदीज से भी एगो इतिहास बा'। ऊ कहले कि; 'रफी से भी रिवायत भइल' नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से असर के नमाज खतम करे के बारे में, लेकिन इ रिवायत मान्य नईखे'। अबू ईसा कहले कि; 'ऐस्याह के हदीस हसन सहीह हदीस ह'। एह राय के कुछ वैज्ञानिक अहलुल नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियन में से चुनले रहले. एहमें उमर, अब्दुल्लाह बिन मसूद, ऐसिया, अनस आ ताबीइन के घेरा के कई लोग शामिल रहे, माने कि असर के नमाज जल्दी करे के बारे में, आ ऊ लोग अस्र के नमाज खतम करे खातिर मकरुख कइल। इ राय अब्दुल्ला बिन मुबारक, स्याफी, अहमद अउरी इशाक' भी लेले रहले|