प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 560
حَدَّثَنَا عِمْرَانُ بْنُ مَيْسَرَةَ قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ قَالَ حَدَّثَنَا حُصَيْنٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي قَتَادَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَسِرْنَا مَعَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَيْلَةً فَقَالَ بَعْضُ الْقَوْمِ لَوْ عَرَّسْتَ بِنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ أَخَافُ أَنْ تَنَامُوا عَنْ الصَّلَاةِ قَالَ بِلَالٌ أَنَا أُوقِظُكُمْ فَاضْطَجَعُوا وَأَسْنَدَ بِلَالٌ ظَهْرَهُ إِلَى رَاحِلَتِهِ فَغَلَبَتْهُ عَيْنَاهُ فَنَامَ فَاسْتَيْقَظَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَدْ طَلَعَ حَاجِبُ الشَّمْسِ فَقَالَ يَا بِلَالُ أَيْنَ مَا قُلْتَ قَالَ مَا أُلْقِيَتْ عَلَيَّ نَوْمَةٌ مِثْلُهَا قَطُّ قَالَ إِنَّ اللَّهَ قَبَضَ أَرْوَاحَكُمْ حِينَ شَاءَ وَرَدَّهَا عَلَيْكُمْ حِينَ شَاءَ يَا بِلَالُ قُمْ فَأَذِّنْ بِالنَّاسِ بِالصَّلَاةِ فَتَوَضَّأَ فَلَمَّا ارْتَفَعَتْ الشَّمْسُ وَابْيَاضَّتْ قَامَ فَصَلَّى
[इमरान बिन मैसरा] ने हमसे कहा, [मुहम्मद बिन फुदलैल] ने हमसे कहा, [हुसैन] ने [अब्दुल्ला बिन अबू क़तादा] ने [अपने पिता] से कहा, “हम एक रात पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ घूम रहे थे। कुछ लोगों ने कहा, “अल्लाह के रसूल, क्या आप हमारे साथ थोड़ी देर आराम करना चाहेंगे?” उन्होंने कहा, “मुझे डर है कि आप सो जाएँगे और नमाज़ नहीं पढ़ पाएँगे।” बिलाल ने कहा, “मैं तुम्हें जगा दूँगा।” तो वे लेट गए, जबकि बिलाल अपनी गाड़ी पर झुक गया, लेकिन उसे नींद आ गई और वह सो गया। जब पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जागे, तो सूरज उग चुका था, तो उन्होंने कहा, “अरे बिलाल, तुम जो कहते हो उसका सबूत कहाँ है?” बिलाल ने कहा, “मुझे पहले कभी ऐसी नींद नहीं आई।” फिर उन्होंने कहा, “सच में, अल्लाह, सबसे ऊँचा, तुम्हारी रूहों को जैसा चाहता है, ले लेता है और उन्हें तुम्हारे पास लौटा देता है। जैसा वह चाहे। ऐ बिलाल, खड़े हो जाओ और लोगों को नमाज़ के लिए बुलाओ (घोषणा करो)!" फिर उसने वज़ू किया, जब सूरज निकला और सफ़ेद रोशनी दिखाई दी, तो वह नमाज़ के लिए खड़ा हो गया।"