हदीस
Dalam mimpiku berhijrah dari makkah ke madinah, kota yatsrib
Imam Ibnu Majah : 3911حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلَانَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ حَدَّثَنَا بُرَيْدَةُ عَنْ أَبِي بُرْدَةَ عَنْ أَبِي مُوسَىعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ رَأَيْتُ فِي الْمَنَامِ أَنِّي أُهَاجِرُ مِنْ مَكَّةَ إِلَى أَرْضٍ بِهَا نَخْلٌ فَذَهَبَ وَهَلِي إِلَى أَنَّهَا يَمَامَةُ أَوْ هَجَرٌ فَإِذَا هِيَ الْمَدِينَةُ يَثْرِبُ وَرَأَيْتُ فِي رُؤْيَايَ هَذِهِ أَنِّي هَزَزْتُ سَيْفًا فَانْقَطَعَ صَدْرُهُ فَإِذَا هُوَ مَا أُصِيبَ مِنْ الْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ أُحُدٍ ثُمَّ هَزَزْتُهُ فَعَادَ أَحْسَنَ مَا كَانَ فَإِذَا هُوَ مَا جَاءَ اللَّهُ بِهِ مِنْ الْفَتْحِ وَاجْتِمَاعِ الْمُؤْمِنِينَ وَرَأَيْتُ فِيهَا أَيْضًا بَقَرًا وَاللَّهُ خَيْرٌ فَإِذَا هُمْ النَّفَرُ مِنْ الْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ أُحُدٍ وَإِذَا الْخَيْرُ مَا جَاءَ اللَّهُ بِهِ مِنْ الْخَيْرِ بَعْدُ وَثَوَابِ الصِّدْقِ الَّذِي آتَانَا اللَّهُ بِهِ يَوْمَ بَدْرٍ
हमनी के बतवले बाड़े [महमुद बिन घैलन] हमनी के बतवले बाड़े [अबू उसामा] हमनी के [बुरैदा] से [अबू बुरदाह] से [अबू मूसा] से नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से बतवले बाड़े, उ कहले कि, 'हम सपना देखले रहनी कि हम मक्का से एगो अयीसन धरती प प्रवास कईले बानी, जहवां खजूर के पेड़ बहुत रहे, एहसे हमरा लागल कि इ यामामाह या हाजर ह, लेकिन इ पता चलल कि इलाका मदीना, यथरीब रहे। आ सपना में देखनी कि हम आपन तलवार काटत बानी बाकिर बीच टूट गइल, पता चलल कि ऊ उहुद के लड़ाई में आस्तिकन पर जवन आफत आइल रहे ओकर निशानी रहे. फेर हम ओकरा के फेर से मार दिहनी आ ऊ पहिले से बढ़िया से लवटल आ लागत बा कि ऊ अल्लाह के दिहल जीत आ मुसलमानन के एकता के निशानी रहे. अल्लाह के कसम, सपना में हम एगो गाय आ भलाई भी देखनी जवन अल्लाह देले रहले, आ पता चलल कि उहुद के लड़ाई में इ मुसलमानन के एगो समूह के निशानी रहे, आ पता चलल कि अच्छाई उ सब कुछ रहे जवन अल्लाह ओकरा बाद आईल भलाई से देले रहले, इमानदारी के इनाम के रूप में जवन अल्लाह बदर के लड़ाई में देले रहले।