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Ke surga hingga dilihatkan di neraka, kalau berbuat buruk menambah rasa syukur
Imam Bukhari : 6084حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ حَدَّثَنَا أَبُو الزِّنَادِ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا يَدْخُلُ أَحَدٌ الْجَنَّةَ إِلَّا أُرِيَ مَقْعَدَهُ مِنْ النَّارِ لَوْ أَسَاءَ لِيَزْدَادَ شُكْرًا وَلَا يَدْخُلُ النَّارَ أَحَدٌ إِلَّا أُرِيَ مَقْعَدَهُ مِنْ الْجَنَّةِ لَوْ أَحْسَنَ لِيَكُونَ عَلَيْهِ حَسْرَةً
हमसे [अबुल यमन] बतावा गा है [स्युएब] हमसे [अबू अज़ ज़नाद] [अल अरज] से [अबू हुरैराह] से कहिन है, पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'एक मनई तब तक स्वर्ग मा प्रवेश नाहीं करि जब तक कि ओका नरक मा आपन आसन नाहीं देखावा जात है, ताकि अगर उ कुछ करत है तौ ओकर कृतज्ञता बढ़ सकत है। अऊर एक मनई तब तक नरक मा प्रवेश नाहीं करि जब तक कि ओका स्वर्ग मा आपन आसन नाहीं देखावा जात है, ताकि अगर उ अच्छा करत है तौ उ ओकरे लिए नुकसान होइ जात है'।