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Manusia paling besar fitnahnya, adalah orang mencaci orang, dia membalas mencaci
Imam Ibnu Majah : 3751حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ عَنْ شَيْبَانَ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ عَنْ يُوسُفَ بْنِ مَاهَكَ عَنْ عُبَيْدِ بْنِ عُمَيْرٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ أَعْظَمَ النَّاسِ فِرْيَةً لَرَجُلٌ هَاجَى رَجُلًا فَهَجَا الْقَبِيلَةَ بِأَسْرِهَا وَرَجُلٌ انْتَفَى مِنْ أَبِيهِ وَزَنَّى أُمَّهُ
हमसे कहिन है [अबू बकर बिन अबू स्याबा] हमसे [उबैदुल्लाह] से [सैबान] से [अल अमासी] से [अमरू बिन मुर्रा] से [यूसुफ बिन महक] से [उबैदुल्लाह उमैर] से ['ऐस्या] से कहिन हैं, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में सबसे बड़ी बदनामी वाला व्यक्ति उ है जे केहू का अपमान करत है, फिर उ बदले मा ओकर अपमान करत है जब तक कि पूरा जनजाति अपमान मा शामिल न होइ जाय, अऊर एक आदमी जे अपने पिता से छुटकारा पा लेत है अऊर अपनी महतारी के साथ व्यभिचार करत है'।