प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 2283
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ عَنْ مَالِكٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ الْأَعْرَجِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَا يَمْنَعْ جَارٌ جَارَهُ أَنْ يَغْرِزَ خَشَبَهُ فِي جِدَارِهِثُمَّ يَقُولُ أَبُو هُرَيْرَةَ مَا لِي أَرَاكُمْ عَنْهَا مُعْرِضِينَ وَاللَّهِ لَأَرْمِيَنَّ بِهَا بَيْنَ أَكْتَافِكُمْ
हमें [अब्दुल्ला बिन मसलमा] को [मलिक] से [इब्न शिहाब] से [अल अरज] से [अबू हुरैरा रदलिअल्लाहु अन्हु] से बताया गया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "कोई भी अपने पड़ोसी को अपने घर की दीवार से लकड़ी टिकाने से न रोके।" फिर अबू हुरैरा, अल्लाह उन पर प्रसन्न हो, ने कहा: "मुझे यह न देखने दो कि तुम इस कानून के प्रावधानों को अस्वीकार कर रहे हो। अल्लाह की कसम, अगर ऐसा हुआ, तो मैं तुम्हारे बगल में लकड़ियाँ फेंक दूँगा।"