हदीस
Kedua orang tuamu itu termasuk dari orang-orang yang mentaati perintah allah dan rasul-nya sesudah mereka mendapat luka (dalam perang Uhud)
Imam Ibnu Majah : 121حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ وَهَدِيَّةُ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ قَالَا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ قَالَ قَالَتْ عَائِشُةُيَا عُرْوَةُ كَانَ أَبَوَاكَ مِنْ الَّذِينَ اسْتَجَابُوا لِلَّهِ وَالرَّسُولِ مِنْ بَعْدِ مَا أَصَابَهُمْ الْقَرْحُ أَبُو بَكْرٍ وَالزُّبَيْرُ
हमनी के बतावल गइल बा कि [हिस्याम बिन अम्मर] आ [हदीया बिन अब्दुल वहाब] दुनु कहले रहले; हमनी के [सुफयान बिन उयैनह] [हिस्याम बिन उर्वाह] से [अपना पिता] से बतवले बाड़े उ कहले; [ऐशा] कहली कि; 'हे उरवाह, तोहार माई-बाबूजी ओह लोग में शामिल रहले जे घायल होखला के बाद अल्लाह आ रसूलुल्लाह के पुकार के जवाब देले रहले; अर्थात अबू बकर आ जुबैर'।