प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 6611
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ حَدَّثَنِي نَافِعٌ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ السَّمْعُ وَالطَّاعَةُ عَلَى الْمَرْءِ الْمُسْلِمِ فِيمَا أَحَبَّ وَكَرِهَ مَا لَمْ يُؤْمَرْ بِمَعْصِيَةٍ فَإِذَا أُمِرَ بِمَعْصِيَةٍ فَلَا سَمْعَ وَلَا طَاعَةَ
हमें [मुसद्दद] ने बताया है, हमें [याह्या बिन सईद] ने ['उबैदुल्लाह] से बताया है, मुझे [नफी'] ने [अब्दुल्ला] रददिलल्लाहु अन्हु से बताया है, पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: "सुनना और पालन करना प्रत्येक मुसलमान के लिए अनिवार्य है, चाहे वह इसे पसंद करे या जो उसे पसंद न हो, जब तक कि उसे अनैतिकता करने का आदेश न दिया गया हो, लेकिन अगर उसे अनैतिकता करने का आदेश दिया गया है, तो कोई अधिकार नहीं है सुनना और पालन करना।"