प्रतिनिधि हदीस
इमाम बुखारी : 1814
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ أَبِي سَلَمَةَ قَالَ سَمِعْتُ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا تَقُولُكَانَ يَكُونُ عَلَيَّ الصَّوْمُ مِنْ رَمَضَانَ فَمَا أَسْتَطِيعُ أَنْ أَقْضِيَ إِلَّا فِي شَعْبَانَ قَالَ يَحْيَى الشُّغْلُ مِنْ النَّبِيِّ أَوْ بِالنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमें बताया है [अहमद बिन यूनुस] ने हमें बताया है [ज़ुहैर] ने हमें बताया है [याह्या] ने [अबू सलमा] से कहा; मैंने ['ऐस्या रदलिअल्लाहु अन्हा] को यह कहते सुना: "मुझ पर रमज़ान के रोज़े का फ़र्ज़ है और मैं शाबान के महीने के अलावा इसे नहीं चुका सकता"। याह्या ने कहा: "क्योंकि वह पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वजह से या उनके साथ व्यस्त था।"