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इस्लाम अल-हक: कुरआन आ हदीस
(सच्चा इस्लाम)



- Malaikat Malaikat Jibril Malaikat jibril mengajarkan Al-Qur’an dan menjelaskan berbagai ilmu Malaikat jibril datang kepada manusia untuk mengajarkan agama mereka yaitu iman, islam, ihsan, dan tanda-tanda kiamat

हदीस :
हदीस : 1
हदीस
Malaikat jibril datang kepada manusia untuk mengajarkan agama mereka yaitu iman, islam, ihsan, dan tanda-tanda kiamat
Imam Abu Dawud : 4075

حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ حَدَّثَنَا أَبِي حَدَّثَنَا كَهْمَسٌ عَنْ ابْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ قَالَ كَانَ أَوَّلَ مَنْ تَكَلَّمَ فِي الْقَدَرِ بِالْبَصْرَةِ مَعْبَدٌ الْجُهَنِيُّ فَانْطَلَقْتُ أَنَا وَحُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحِمْيَرِيُّ حَاجَّيْنِ أَوْ مُعْتَمِرَيْنِ فَقُلْنَا لَوْ لَقِينَا أَحَدًا مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَأَلْنَاهُ عَمَّا يَقُولُ هَؤُلَاءِ فِي الْقَدَرِ فَوَفَّقَ اللَّهُ لَنَا عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ دَاخِلًا فِي الْمَسْجِدِ فَاكْتَنَفْتُهُ أَنَا وَصَاحِبِي فَظَنَنْتُ أَنَّ صَاحِبِي سَيَكِلُ الْكَلَامَ إِلَيَّ فَقُلْتُ أَبَا عَبْدِ الرَّحْمَنِ إِنَّهُ قَدْ ظَهَرَ قِبَلَنَا نَاسٌ يَقْرَءُونَ الْقُرْآنَ وَيَتَفَقَّرُونَ الْعِلْمَ يَزْعُمُونَ أَنْ لَا قَدَرَ وَالْأَمْرَ أُنُفٌ فَقَالَ إِذَا لَقِيتَ أُولَئِكَ فَأَخْبِرْهُمْ أَنِّي بَرِيءٌ مِنْهُمْ وَهُمْ بُرَآءُ مِنِّي وَالَّذِي يَحْلِفُ بِهِ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ لَوْ أَنَّ لِأَحَدِهِمْ مِثْلَ أُحُدٍ ذَهَبًا فَأَنْفَقَهُ مَا قَبِلَهُ اللَّهُ مِنْهُ حَتَّى يُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ ثُمَّ قَالَ حَدَّثَنِي عُمَرُ بْنُ الْخَطَّابِ قَالَبَيْنَمَا نَحْنُ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ طَلَعَ عَلَيْنَا رَجُلٌ شَدِيدُ بَيَاضِ الثِّيَابِ شَدِيدُ سَوَادِ الشَّعْرِ لَا يُرَى عَلَيْهِ أَثَرُ السَّفَرِ وَلَا نَعْرِفُهُ حَتَّى جَلَسَ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَسْنَدَ رُكْبَتَيْهِ إِلَى رُكْبَتَيْهِ وَوَضَعَ كَفَّيْهِ عَلَى فَخِذَيْهِ وَقَالَ يَا مُحَمَّدُ أَخْبِرْنِي عَنْ الْإِسْلَامِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْإِسْلَامُ أَنْ تَشْهَدَ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ وَتُقِيمَ الصَّلَاةَ وَتُؤْتِيَ الزَّكَاةَ وَتَصُومَ رَمَضَانَ وَتَحُجَّ الْبَيْتَ إِنْ اسْتَطَعْتَ إِلَيْهِ سَبِيلًا قَالَ صَدَقْتَ قَالَ فَعَجِبْنَا لَهُ يَسْأَلُهُ وَيُصَدِّقُهُ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ الْإِيمَانِ قَالَ أَنْ تُؤْمِنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ وَتُؤْمِنَ بِالْقَدَرِ خَيْرِهِ وَشَرِّهِ قَالَ صَدَقْتَ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ الْإِحْسَانِ قَالَ أَنْ تَعْبُدَ اللَّهَ كَأَنَّكَ تَرَاهُ فَإِنْ لَمْ تَكُنْ تَرَاهُ فَإِنَّهُ يَرَاكَ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ السَّاعَةِ قَالَ مَا الْمَسْئُولُ عَنْهَا بِأَعْلَمَ مِنْ السَّائِلِ قَالَ فَأَخْبِرْنِي عَنْ أَمَارَاتِهَا قَالَ أَنْ تَلِدَ الْأَمَةُ رَبَّتَهَا وَأَنْ تَرَى الْحُفَاةَ الْعُرَاةَ الْعَالَةَ رِعَاءَ الشَّاءِ يَتَطَاوَلُونَ فِي الْبُنْيَانِ قَالَ ثُمَّ انْطَلَقَ فَلَبِثْتُ ثَلَاثًا ثُمَّ قَالَ يَا عُمَرُ هَلْ تَدْرِي مَنْ السَّائِلُ قُلْتُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ أَعْلَمُ قَالَ فَإِنَّهُ جِبْرِيلُ أَتَاكُمْ يُعَلِّمُكُمْ دِينَكُمْحَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى عَنْ عُثْمَانَ بْنِ غِيَاثٍ قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ عَنْ يَحْيَى بْنِ يَعْمَرَ وَحُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ قَالَا لَقِيَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ فَذَكَرْنَا لَهُ الْقَدَرَ وَمَا يَقُولُونَ فِيهِ فَذَكَرَ نَحْوَهُ زَادَ قَالَ وَسَأَلَهُ رَجُلٌ مِنْ مُزَيْنَةَ أَوْ جُهَيْنَةَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فِيمَا نَعْمَلُ أَفِي شَيْءٍ قَدْ خَلَا أَوْ مَضَى أَوْ فِي شَيْءٍ يُسْتَأْنَفُ الْآنَ قَالَ فِي شَيْءٍ قَدْ خَلَا وَمَضَى فَقَالَ الرَّجُلُ أَوْ بَعْضُ الْقَوْمِ فَفِيمَ الْعَمَلُ قَالَ إِنَّ أَهْلَ الْجَنَّةِ يُيَسَّرُونَ لِعَمَلِ أَهْلِ الْجَنَّةِ وَإِنَّ أَهْلَ النَّارِ يُيَسَّرُونَ لِعَمَلِ أَهْلِ النَّارِ حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا الْفِرْيَابِيُّ عَنْ سُفْيَانَ قَالَ حَدَّثَنَا عَلْقَمَةُ بْنُ مَرْثَدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ بْنِ بُرَيْدَةَ عَنْ ابْنِ يَعْمَرَ بِهَذَا الْحَدِيثِ يَزِيدُ وَيَنْقُصُ قَالَ فَمَا الْإِسْلَامُ قَالَ إِقَامُ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَحَجُّ الْبَيْتِ وَصَوْمُ شَهْرِ رَمَضَانَ وَالِاغْتِسَالُ مِنْ الْجَنَابَةِ قَالَ أَبُو دَاوُد عَلْقَمَةُ مُرْجِئٌ

हमनी के बतावल गईल बा [उबैदुल्लाह बिन मुअदज] कहले, हमनी के बतावल गईल बा [हमार पिता] कहले, हमनी के [कहमस] के [इब्न बुराइदा] से [याह्या बिन या'मर] से बतावल गईल बा उ कहले कि, 'बसराह शहर में भाग्य के मुद्दा प सबसे पहिले जवन आदमी बोलले रहले, उ रहले म'बाद अल जुहानी।' हम आ हुमैद बिन अब्दुररहमान अल हिम्यारी हज भा उमरा में चल गइनी। हम तब बड़बड़ात रहनी कि अगर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कवनो साथी से भेंट होखब त ओकरा से पूछब कि लोग किस्मत के बारे में का कहेला। तब अल्लाह हमनी के किस्मत में [अब्दुल्लाह बिन उमर] से मिले के किस्मत में लिखले रहले जब उ मस्जिद में घुसे वाला रहले, एहसे हम अवुरी हमार दोस्त उनुका लगे पहुंचनी। हमरा लागल कि हमार दोस्त हमरा खातिर बातचीत के प्रतिनिधित्व करी, त हम कहनी, 'हे अबू अब्दुररहमान, हमनी के बीच अइसन लोग प्रकट भइल बा जे कुरान पढ़ेला आ ज्ञान के पीछा करे में लगनशील बा, बाकिर ऊ लोग मानत बा कि कवनो किस्मत नइखे, आ बात बस बिना भाग्य के कवनो हस्तक्षेप के होला!' इब्न उमर तब कहले कि अगर रउआ ओह लोग से मिलनी त कह दीं कि हम ओह लोग से अलग हो गइल बानी आ ऊ लोग भी हमरा से अलग हो गइल बा. आ ओह आदमी के नाम से जेकरा के अब्दुल्ला बिन उमर अपना नाम से किरिया खइले बाड़न कि अगर ओह लोग का लगे उहुद पहाड़ जइसन सोना बा, आ ओकरा बाद ऊ लोग ओकरा के खरच कर देव त अल्लाह तबले ओकरा के तबले ना स्वीकार करी जबले ऊ लोग किस्मत में विश्वास ना कर लेव’. तब उ कहले कि, '[उमर इब्नुल खथथब] हमरा के बतवले, उ कहले कि, 'जब हमनी के रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के संगे रहनी, त अचानक एगो आदमी आईल जवन कि बहुत सफेद कपड़ा पहिनले रहे अवुरी ओकर बाल बहुत करिया रहे।' कवनो संकेत ना रहे कि उ कवनो लमहर सफर पर बाड़े, लेकिन हमनी में से केहु उनुका के ना जानत रहे। फिर उ नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास पहुंचले, उ नबी के घुटना प आपन घुटना झुका के अपना दुनो जांघ प हाथ के हथेली रख देले। एकरा बाद उ कहले कि हे मुहम्मद इस्लाम के बारे में बताव? तब रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जवाब दिहले कि इस्लाम इ ह कि रउआ गवाही देत बानी कि अल्लाह के अलावा इबादत के लायक कवनो देवता नईखन अवुरी मुहम्मद उनुकर रसूलुल्लाह हवे। आप नमाज करेनी, जकात करेनी, रमजान में रोजा रखेनी अवुरी सक्षम होखे प बैतुल्लाह के तीर्थ यात्रा करेनी'। ऊ आदमी कहलस, 'तू सही कहत बाड़ू'। उमर कहले कि, हमनी के उनुका प हैरान रहनी, उ पूछले अवुरी उ खुद एकर पुष्टि कईले। ऊ आदमी फेरु पूछलस, 'ईमान के बारे में बताईं?' उ जवाब दिहले: 'ईमान इ ह कि आप अल्लाह, उनुका फरिश्ता, उनुका किताब, उनुका रसूलुल्लाह, अंतिम दिन प विश्वास करीं अवुरी किस्मत प विश्वास करीं; खराब भा नीमन'. ऊ आदमी कहलस, 'तू सही कहत बाड़ू'। ऊ आदमी आगे कहलस, 'बतावऽ इहसान का होला?' उ जवाब देले कि, 'तू अल्लाह के अयीसन इबादत करेनी जईसे कि आप उनुका के देखतानी, जदी उनुका के नईखी देख सकत त सचमुच उ आपके देख सकतारे'। ऊ आदमी फेरु पूछलस कि कयामत के दिन के बारे में बताईं? उ जवाब देले कि, 'अयीसन नईखे कि पूछल जाए वाला से पूछे वाला से जादे जानकारी बा'। ऊ आदमी पूछलसि, 'तब बतावऽ संकेत?' उ जवाब दिहले: 'अगर कवनो गुलाम अपना मालिक के जन्म देले बा, त रउआ देखब कि नंगे गोड़ वाला लोग - गरीब - अवुरी भेड़ चरवाहा लंबा इमारत बनावे के होड़ लगावत बाड़े'। उमर कहले कि तब उ आदमी चल गईल, अवुरी हम तीन दिन तक चुप रहनी। फेर कहलन: हे उमर, का रउरा मालूम बा कि ऊ आदमी जे ऊ सवाल पूछले रहे ऊ के रहे? हम जवाब देनी कि अल्लाह अवुरी उनुकर रसूलुल्लाह एकरा से जादे जानतारे। उ कहले कि, 'उ त जिब्राईल हवे, उ आपके धार्मिक मामला के बारे में सिखावे खाती आपके लगे आईल रहले'। हमनी के बतवले बाड़े [मुसद्दद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [याह्या] से [उस्मान बिन घियात] उ कहले बाड़े; हमरा के [अब्दुल्लाह बिन बुराइदा] [याह्या बिन या'मर] से बतवले बाड़े अवुरी [हुमैद बिन अब्दुररहमान] दुनो कहले बाड़े कि, 'हमनी के [अब्दुल्लाह बिन उमर] से मुलाकात कईनी, फेर हमनी के उनुका के किस्मत के बारे में बतवनी अवुरी लोग एकरा बारे में का कहतारे.... तब उ हदीस के जिक्र कईले। लेकिन उ आगे कहले, उ कहले 'तब मुजैना भा जुहैना के एगो आदमी रहे जवन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से पूछले कि हे रसूलुल्लाह, हमनी के दान कईसे करे के चाही? का ई प्रथा बीतल भाग्य पर आधारित बा कि कवनो नया चीज पर आधारित बा?' उ जवाब दिहले: 'कवनो चीज़ के आधार प जवन तय भईल बा'। ऊ आदमी, भा कुछ लोग फेरु पूछलसि कि ‘तब हमनी का दान काहे करीले? उ जवाब देले: 'वास्तव में स्वर्ग के लोग के कर्म से स्वर्ग के लोग के नीमन काम करे में आसानी होई अवुरी नरक के लोग के नरक के लोग के कर्म से नीमन काम करे में आसानी होई'। हमनी के बतवले बाड़े [महमूद बिन खालिद] कहले बाड़े, बता देले बाड़े [अल फिर्याबी] से [सुफियान] उ कहले बाड़े; हमनी के [अलकामा बिन मर्तसाद] से [सुलेमान बिन बुराइदा] से [इब्न या'मर] से उहे हदीस के संगे बतवले बाड़े, 'बढ़त-घटत'। पूछले कि तब इस्लाम का ह? उ जवाब देले कि, 'नमाज करीं, जकात करीं, हज करीं, रमजान के महीना में रोजा करीं, अवुरी जुनुब नहाईं'। अबू दाऊद कहले कि अलकामा मुरजिया ह।

हदीस :

Imam Ahmad : 179, 186, 346, 352, 5592, 8808, 9031, 9137, 16541, 16851, 21502, 21577
Imam Bukhari : 48, 4404
Imam Muslim : 9, 10, 11, 2773
Imam Abu Dawud : 4075
Imam Tirmidzi : 2535
Imam Nasa'i : 4904, 4905
Imam Ibnu Majah : 62, 63